LUCKNOW UNIVERSITY:नए सत्र से छात्र हित में लाइब्रेरी के नियमों में किया गया बदलाव, जानें 80 हजार पुस्तकों के संग्रह वाली को-आपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी की विशेषता

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय नए सत्र से को-आपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी के नियमों में बदलाव करने जा रहा है। ताकि विद्यार्थियों को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। इसी के साथ नई पुस्तकों की खरीद के लिए भी निर्णय लिया गया है।

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को-आपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी की उपयोगिता और लोकप्रियता को देखते हुए कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं जैसे कि नए शैक्षणिक सत्र के लिए अतिरिक्त पुस्तकों की खरीदारी की जाए। साथ ही, अब प्रत्येक छात्र एक शैक्षणिक सत्र के लिए 5 पुस्तकें प्राप्त कर सकता है, जबकि पहले चार पुस्तकों का प्रावधान था। इस प्रकार, अब प्रत्येक छात्र रोटेशन पर प्रति शैक्षणिक सत्र में लगभग 10-12 पुस्तकों से लाभान्वित हो सकता है। यह छात्र समुदाय के लिए एक बड़ी राहत है। प्रोफेसर राघवेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में पुस्तकालय प्रशासन नए शैक्षणिक सत्र के लिए छात्रों के स्वागत की तैयारी कर रहा है।

1966-67 में की गई थी स्थापना
लखनऊ विश्वविद्यालय का को-आपरेटिव लेंडिंग लाइब्रेरी राज्य एवं उत्तर भारत की एक अनूठी पहल है। यह न केवल उत्तर भारत के विश्वविद्यालयों में बल्कि राज्य के भीतर भी अद्वितीय है। इसकी संकल्पना 1966-67 में विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पाठ्य-पुस्तक सुविधा के रूप में की गई थी। आज यह छात्रों के बीच विषय केन्द्रित पाठ्य पुस्तकों का एक लोकप्रिय केंद्र है, जो इन्हें पूरे शैक्षणिक सत्र के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से छात्रों को महंगी और विदेशी प्रकाशनों की पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाती है, जो बाजार में सहजता से उपलब्ध नहीं हैं। ये पुस्तकें बिना किसी प्रतिभूति या सुरक्षा राशि जमा किए प्राप्त की जा सकती हैं। छात्रों की मांग पर ही छात्र सदस्यता कोष से पिछले पांच वर्षों में पांच हजार से अधिक पुस्तकें खरीदी जा चुकी हैं। इसके परिणामस्वरूप आज कला, वाणिज्य, विज्ञान और शिक्षा संकाय के लिए यह पुस्तकालय लगभग 80,000 पुस्तकों का संग्रह है। विधि की अन्य लगभग 2259 पुस्तकों को विधि विभाग के साथ नए परिसर पुस्तकालय में स्थानांतरित कर दिया गया है।

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ये सुविधा है लाइब्रेरी में
इस लाइब्रेरी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पुस्तकालय छात्रों से अर्जित सदस्यता निधि पर आधारित एक स्वतंत्र स्थायी पहल है। इसे विश्वविद्यालय या किसी अन्य वित्त प्रदाता संस्था से कोई आवर्ती धन प्राप्त नहीं होता है। पुस्तकालय प्रशासन ने छात्रों के लिए न्यूनतम लागत पर फोटोकॉपी, स्वच्छ पेयजल के लिए आर.ओ. आदि की व्यवस्था छात्र सदस्यता कोष से किया है। पुस्तकालय प्रशासन ने एक समावेशी दृष्टिकोण को अपनाते हुए दिव्यांग विद्यार्थियों को पुस्तकें आवंटित करने हेतु एक अलग काउंटर की व्यवस्था की है। इसके अलावा, इसमें डोनेट की गयी पुस्तकों का एक बड़ा संग्रह है जो अकादमिक वर्ग के सहयोग से किया गया है। पुस्तकालय छात्रों और शिक्षकों को समय-समय पर पुस्तकालय को अपनी शैक्षणिक पुस्तकें डोनेट करने के लिए प्रोत्साहित भी करता है।