LU News: षट्कर्म क्रिया से निरोग रहने के उपाय, जानें जलनेति के अभ्यास से क्या मिलता है शारीरिक लाभ
LU News: फैकल्टी ऑफ़ योग एंड अल्टरनेटिव मेडिसिन लखनऊ विश्वविद्यालय एवं इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर योगिक साइंस, यू जी सी, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित योगिक षट्कर्म विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञ प्रशांत शर्मा ने बताया कि शरीर आंतरिक सफाई षट्कर्म के माध्यम से कि जा सकती है। इसमें छह प्रकार की क्रियाएं होती है धौती, नेति, बस्ती, न्यौली, त्राटक, कपालभाति होती है।
जलनेति के अभ्यास से सर दर्द, माइग्रेन दर्द, साइनोसाइटिस, जुखाम, अनिद्रा में लाभ प्राप्त होता है कुंजल क्रिया से अपच, गैस्ट्रिक परेशानी, हाइपर एसिडिटी में लाभ प्राप्त होता है। बस्ती क्रिया के माध्यम से कब्ज तथा आंतों की सफाई की जा सकती है त्राटक के माध्यम से अनिद्रा और छात्र छात्राओं में आई एकाग्रता में कमी दूर किया जा सकता है कपालभाति से कपालरंधर को शोधित किया जा सकता है। और षटकर्म क्रिया की विधियों, लाभ, हानि और सावधानियों के बारे में बताया। फैकल्टी के कोऑर्डनेटर डॉ अमरजीत यादव ने बताया कि आज कल को प्रदूषण सहित जीवनशैली में प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक महीने में एक बार षटकर्म क्रिया किसी योग्य योग प्रशिक्षक के साथ करनी चाहिए इससे शरीर निरोग और आंतरिक रूप से स्वस्थ रहता है। जिससे बीमारियों को दूर रहती हैं। कार्यशाला में फैकल्टी के अध्यापक, योग प्रशिक्षक एवं छात्र छात्राओं की उपस्थिति रही।