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चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल और वस्त्र आदि दान करने का भी कहीं-कहीं चलन दिखाई देता है.
कीर्ति गूंजने लगी जो कि धीरे-धीरे पीढी दर पीढ़ी उनकी कथा के माध्यम से आज भी लोग सावित्री के पतिव्रत धर्म के बारे में जान रहे हैं.
विश्वविद्यालय में अलग अलग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए यूजी की 1933 सीटों पर आवेदन शुरू.
इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश है और जिलाधिकारी को लोग जमकर खरी-खोटी सुना रहे हैं.
भाजपा नेता अपर्णा यादव उस समय लखनऊ में नहीं थीं. प्रतीक के निधन की खबर सुनने के बाद वह असम से लौटीं थीं.
इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में भक्ति, सेवा एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
पेट्रोल-डीजल सहित अन्य खाद्य पदार्थों व सब्जी आदि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं तो वहीं अब दूध के दाम में हुई बढ़ोतरी सीधे आम जनता की जेब पर असर डालेगी.
क्या सिर्फ जनता ही बचत करे और आप लोगों का दायित्व देश के प्रति कुछ नहीं बनता? इसी के बाद ही पीएम मोदी ने काफिले की गाड़ियां कम कर दी हैं.
प्रतीक के शरीर का रंग पूरी तरह से नीला पड़ चुका था और उनके शरीर का वजन काफी बढ़ गया था.