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तो वहीं इसमें लगी पांच गांठें ब्रह्म, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के साथ ही पांच ज्ञानेंद्रियों की प्रतीक मानी गई हैं. जनेऊ को बाएं कंधे के ऊपर और दाईं भुजा के नीचे पहना जाता है.

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि दिव्यांग व सामान्य एक साथ शिक्षा, खेल और तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं.