मान्यता है कि इस दौरान किया गया जप-तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता. इसे अधिक मास भी कहा जाता है.
यह व्रत पति की लम्बी उम्र के लिए सुहागिन महिलाएं रखती हैं. इसी धागे ने दीए से आग पकड़ ली थी और बरगद का पेड़ धूं-धूं कर जलने लगा.
चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, काजल और वस्त्र आदि दान करने का भी कहीं-कहीं चलन दिखाई देता है.
कीर्ति गूंजने लगी जो कि धीरे-धीरे पीढी दर पीढ़ी उनकी कथा के माध्यम से आज भी लोग सावित्री के पतिव्रत धर्म के बारे में जान रहे हैं.
इस प्रकार के धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में भक्ति, सेवा एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
श्रीललित विस्तार ग्रंथ के 21 वें अध्याय के 178 पृष्ठ पर बताया गया है कि संयोगवश गौतम बुद्ध जी ने उसी स्थान पर तपस्या की जिस स्थान पर भगवान बुद्ध ने तपस्या की थी।
गुरु गोविंद सिंह के दो बच्चों को चुनवा दिया गया संविधान के लिए नहीं धर्म के लिए उन्होंने अपने प्राण दे दिए.
कथा प्रसंगों पर आधारित सुंदर नृत्य-नाटिकाएँ प्रस्तुत कर बच्चों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
वृषभ राशि के जातकों को निवेश में लाभ मिलेगा और अटका हुआ पैसा वापस मिलेगा. सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ने के भी योग बन रहे हैं.
शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया के दिन प्रदोष काल यानी शाम के समय हुआ था.