AKTU के 120 करोड़ निकालने के मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता… एक और आरोपी गिरफ्तार; एयरपोर्ट से बरामद हुई कार

October 17, 2025 by No Comments

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AKTU News: एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के यूनियन बैंक आफ इंडिया के खाते से 120 करोड़ रुपये निकालने के मामले में साइबर थाने की पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने गिरोह के एक और सदस्य को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी की पहचान अजय सुरेश भाई पटेल के तौर पर हुई है.

पुलिस ने जालसाजों द्वारा फ्राड के रुपयों से खरीदी गई 20 लाख रुपये कीमत की कार गैंड विटारा कार भी पुणे एयरपोर्ट की पार्किंग से बरामद कर ली है। आरोपित ने ही अपने एक रिश्तेदार के सहयोग से एकेटीयू की फर्जी वेबसाइट बनाने के लिए तीन डोमेन खरीदे थे.

बता दें कि पुलिस कार की जीपीएस लोकेशन से एयरपोर्ट तक पहुंची. पुलिस ने जांच में पाया कि कार को एयरपोर्ट पर खड़ी करने के बाद गिरोह से जुड़ा प्रापर्टी डीलर सऊदी भाग गया है। थानाप्रभारी ब्रजेश यादव ने बताया कि पुलिस टीम ने अजय सुरेश भाई पटेल को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपित गुजरात के भरूच जिले के राजपारडी राधिका सोसाइटी का रहने वाला है.

जालसाज का सिम पुलिस ने कराया ब्लॉक

इस पूरे मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस टीम ने कार बरामद होने को लेकर बताया कि कार में जीपीएस सिस्टम लगा था और वह चांदबाबू के मोबाइल से कनेक्ट था। यही वजह रही कि पहले पुलिस को कार की लोकेशन पता नहीं चल पा रही थी. इस पर पुलिस ने टेलीकाम कंपनी से बात करके चांदबाबू का सिम ब्लाक कराया. इसके बाद कंपनी को पुलिस का नंबर दिया गया फिर कार की लोकेशन पुलिस को पता चल गई. पुलिस ने बताया कि कार लॉक थी और उसे खोलने के लिए कंप्यूटराइज्ड चाभी चाहिए थी.

इस पर पुलिस टीम ने कंपनी से बात करके उसकी डुप्लीकेट चाभी बनवाई और फिर कार खोली गई और मौके से लाया गया. पुलिस ने ये भी बताया कि गुजरात का रहने वाला प्रापर्टी डीलर चांदबाबू गाड़ी लखनऊ से खरीदकर सड़क मार्ग से ले गया और फिर कार को एयरपोर्ट की पार्किंग पर खड़ा कर दिया व खुद सऊदी भाग गया था तो वहीं गिरोह का मुख्य सरगना कपिल लंदन भागा हुआ है.

जानें क्या है मामला?

बता दें कि बीते जून के महीने में जालसाज गिरोह से जुड़ा अनुराग श्रीवास्तव एकेटीयू पहुंचा. दरअसल एकेटीयू द्वारा 120 करोड़ रुपये की एफडी कराई जानी थी. तो वहीं एकेटीयू पहुंचकर जालसाज ने खुद को यूनियन बैंक आफ इंडिया का मैनेजर बताया और अधिक ब्याज का प्रलोभन देकर बिड में शामिल हो गया. यूनियन बैंक आफ इंडिया का फर्जी अथारिटी लेटर फाइनेंस कंट्रोलर को थमा दिया. इसके बाद दूसरे दिन खुद को एकेटीयू का फाइनेंस कंट्रोलर बताकर फर्जी वेबसाइड बना डाली और फिर बैंक मैनेजर से मिलने पहुंच गया। इसके बाद उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर विश्वविद्यालय के खाते से 120 करोड़ रुपये निकाल लिए और फिर गुजरात व अहमदाबाद के खातों में रकम ट्रांसफर करा दी. मामला सामने आने के बाद से ही साइबर थाने की टीम लगातार कार्रवाई कर रही है और अब तक गिरोह से जुड़े आठ से नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. फिलहाल पुलिस की आगे की कार्रवाई जारी है.

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