अब सुअर के लिवर-किडनी से बचेगी इंसान की जान…! पहली बार इन अंगों को एक साथ ट्रांसप्लांट कर चिकित्सकों ने किया बड़ा कारनामा
China Medical Breakthrough: दुनिया भर में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कैंसर जैसी क्रॉनिक बीमारियों की वजह से हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है और सबसे अहम बात ये कि इनमें से अधिकांश मौतें आवश्यक अंग न मिल पाने की वजह से होती है. हालांकि पिछले दशकों में मेडिकल साइंस ने अंग प्रत्यारोपण के मामले में कई हैरान कर देने वाले कारनामे किए हैं.
तो अब इसी क्रम में एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि चिकित्सा विज्ञान ने एक और ऐतिहासिक चमत्कार करते हुए बड़ा कारनामा कर दिया है. पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी इंसान के शरीर में सुअर का लिवर और किडनी दोनों को एक साथ ट्रांसप्लांट करने में सफलता पाई गई है. इस सफलता को अंग प्रत्यारोपण की दुनिया में एक संभावित क्रांति मानी जा रही है.
वैज्ञानिक लंबे समय से जानवर के अंगों को इंसानों में सुरक्षित तरीके से प्रत्यारोपित करने की तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं, क्योंकि अक्सर देखा जाता है कि जरूरी अंग न मिल पाने की वजह से मरीज इंतजार करते-करते मौत के मुंह में चला जाता है. तो वहीं इस बड़ी सफलता ने अब लोगों के मन में उम्मीद जगा दी है.
हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब इंसानों में सुअर के अंग लगाए गए हों, लेकिन अधिकांश प्रयास केवल एक अंग तक ही सीमित रहे, जबकि इस बार यानी पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साथ दो अंगों को प्रत्यारोपित किया गया है.
इस तरह के प्रत्यारोपण को जेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है. इस मतलब, एक प्रजाति से दूसरे में पूरे अंग, टिशू या कोशिकाएं ट्रांसप्लांट करना है.
चीन के डॉक्टर्स ने किया है ये कारनामा
नेचर जर्नल में छपी रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें लिखा गया है कि चीन के शोधकर्ताओं और डॉक्टर्स की टीम ने दुनिया का पहला मल्टी-ऑर्गन पिग-टू-ह्यूमन ट्रांसप्लांट किया है. ये अंग 53 वर्षीय ऐसे व्यक्ति को लगाए गए हैं जो पहले से ही ब्रेन-डेड था. इस रिसर्च के लिए परिवार ने पहले ही अपनी सहमति दी थी।
रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉक्टर रियल टाइम में ये देख सके कि ये जानवरों के अंग इंसान के शरीर में कैसे काम करते हैं? यानी जेनेटिक तौर पर तैयार ट्रांसप्लांट किए गए सुअर के अंगों ने करीब 5 दिनों तक बेहतर तरीके से काम किया.
ट्रांसप्लांट के बाद निकला ये परिणाम
चिकित्सकों ने देखा कि अंग ट्रांसप्लांट के शुरुआती 24 घंटों में अंगों द्वारा इसे अस्वीकार करने के कोई संकेत नहीं मिले. इससे भविष्य के लिए उम्मीद जगी है कि अंगों की गंभीर कमी की समस्या का समाधान किया जा सकेगा.
सालों से शोधकर्ता इस बात को लेकर विचार कर रहे थे कि क्या सुअर के अंग, इंसानों में अंगों की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं? जेनेटिक इंजीनियरिंग और सुअर के डीएनए को एडिट करने में जो सफलता मिली है, उसने एक संभावना में बदल दिया है. दरअसल विशेषज्ञों का दावा है कि एक ही समय में कई अंगों का प्रत्यारोपण तकनीकी रूप से बहुत ही अधिक जटिल होता है. यही नहीं इससे जुड़े जोखिम भी कहीं अधिक होते हैं. इस नजर से भी यह उपलब्धि बहु-अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
शोधकर्ताओं के अनुसार प्रत्यारोपण के 19 घंटे के भीतर सुअर का लिवर पित्त रिलीज करने लगे और उसके सामान्य रूप से काम करने के संकेत मिलने लगे।
मरीज के शरीर में क्रिएटिनिन और यूरिया का स्तर, किडनी रोग के कारण पहले बढ़ा हुआ था। दोनों किडनी लगाए जाने के बाद ये सामान्य स्तर पर लौट आया।
यह इस बात का संकेत था कि प्रत्यारोपित किडनी भी कार्य कर रही थीं।
इससे डॉक्टर इस नतीजे पर पहुंचे कि जेनेटिक रूप से संशोधित सुअर के अंग मानव शरीर में महत्वपूर्ण जैविक कार्य करने में सक्षम हो सकते हैं।
अभी है और अधिक अध्ययन की जरूरत
बता दें कि ये उपलब्धि विशेषज्ञों ने ब्रेन डेड व्यक्ति पर शोध कर हासिल की है. चिकित्सकों का मानना है कि अब जीवित बंदरों पर भी इसका अध्ययन करने की जरूरत है. क्योंकि सुअर के अंगों के जरिए इंसान में किसी प्रकार के वायरस या बैक्टीरिया न पहुंचें, इसके लिए भी शोध करने की जरूरत है. फिलहाल इस दिशा में शोधकर्ता कार्य कर रहे हैं.