वाराणसी में खुलेगा शकुन्तला विवि का पहला सेंटर…दिव्यांगों से लेकर कर्मचारी-खिलाड़ी और स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों को दी जाएगी ये सुविधा

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Shakuntala University: डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में शोधार्थियों को अब पीएचडी मौखिकी परीक्षा पूर्ण होने की तिथि से ही उपाधि प्रदान की जाएगी। साथ ही स्नातक, परास्नातक और पीएचडी के विद्यार्थियों को शोध पत्र प्रस्तुति के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाएगी।

विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के बच्चों के लिए कर्मचारी वार्ड कोटा, खिलाड़ियों और स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था भी जारी रहेगी। विश्वविद्यालय की 40वीं विद्या परिषद की बैठक कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अनुमोदन मिला है। यह जानकारी विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय ने दी।

वाराणसी में खुलेगा विवि का पहला क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र

कुलपति आचार्य संजय सिंह के विशेष पहल पर विश्वविद्यालय अपना पहला क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र वाराणसी में खोलने जा रहा है। विद्या परिषद से मंजूरी मिल चुकी है। यह केंद्र खुशीपुर स्थित अमरावती पुरुषोत्तम राजकीय बहुद्देशीय दिव्यांगजन विकास संस्थान में स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र में छह हॉल और 16 कमरों की व्यवस्था होगी। सत्र 2026-27 से पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू होने की संभावना है। प्रथम चरण में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम, बीवीए और चार वर्षीय बीए (एनईपी) शुरू किए जा सकते हैं।

पेपर प्रेजेंशन के लिए आर्थिक सहायता, विद्यार्थी देंगे फीडबैक

विश्वविद्यालय के यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनार, संगोष्ठी और कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीएचडी शोधार्थियों को 20 हजार रुपये तथा यूजी और पीजी (ऑनर्स विद रिसर्च) के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये तक की सहायता मिलेगी। शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए विद्यार्थियों से स्टूडेंट फीडबैक फॉर्म भरवाने की व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई है।

विशेष आरक्षण की व्यवस्था, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एडमिशन रूल्स एंड प्रोसिजर्स को भी मंजूरी

पीएचडी, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई), रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआई) और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) द्वारा मान्यता प्राप्त कोर्सों को छोड़कर कर्मचारियों के बच्चों के लिए 10 प्रतिशत सुपरन्यूमेरेरी सीट, खिलाड़ियों के लिए पांच प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा और स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों के लिए दो प्रतिशत आरक्षण जारी रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश और सुविधाओं से संबंधित नियमों को भी स्वीकृति दी गई। इसके तहत इंटरनेशनल स्टूडेंट सेल विदेशी छात्रों को प्रवेश से लेकर पढ़ाई तक सहायता प्रदान करेगा, जिससे विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान मजबूत होगी।

दिव्यांगों के लिए डिस्टैंस लर्निंग की व्यवस्था

इसके अलावा विश्वविद्यालय के प्रचार-प्रसार के लिए प्रदेश के विभिन्न मंडलों में प्रतिनिधिमंडल भेजने तथा यूजीसी की करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत वर्ष 2026 में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया समर्थ पोर्टल के माध्यम से कराने का निर्णय भी लिया गया। विश्वविद्यालय की ओर से दूरस्थ शिक्षा पद्धति (ओपन एंड डिस्टैंस लर्निंग) के माध्यम से दिव्यांग छात्रों के लिए कौशल विकास कोर्स शुरू किए जाने पर भी स्वीकृति मिली। जिससे उन्हें घर बैठे पढ़ाने और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग के अवसर मिलेंगे। दिव्यांग छात्रों, दूर-दराज के विद्यार्थियों और पूरे समाज को सीधा लाभ मिल सकेगा।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कही ये बात

कुलपति आचार्य संजय सिंह, डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने कहा, “विद्या परिषद में लिए गए ये सभी निर्णय विद्यार्थियों, विशेषकर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। वाराणसी में क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र की स्थापना से उच्च शिक्षा की पहुंच और व्यापक होगी, वहीं डिस्टैंस लर्निंग और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हम उन छात्रों तक भी शिक्षा पहुंचा सकेंगे, जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं हो पाते। शोधार्थियों को प्रोत्साहन, अंतरराष्ट्रीय अवसरों का विस्तार और पारदर्शी शैक्षणिक व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है, जिससे विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।”

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