TET अनिवार्यता को लेकर फूटा शिक्षकों का क्रोध…विरोध प्रदर्शन कर PM-CM के नाम का दिया ज्ञापन-Video
TET Mandatory Protest: बेसिक शिक्षा विभाग में सालों से नौकरी कर रहे पुराने शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता को लेकर वर्तमान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी कानपुर को सौंपा.
इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के बैनर तले विरोध रैली निकाल कर पुराने शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता खत्म करने की मांग की.
ज्ञापन के जरिए शिक्षकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों में वर्तमान समय में गहरी चिंता, पीड़ा एवं असुरक्षा की भावना व्याप्त है। इसका कारण 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना एवं केंद्र सरकार द्वारा आर टी ई एक्ट के सेक्शन 23(2) में दिनांक 9 अगस्त 2017 को किए गए संशोधन तथा उसके संदर्भ में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 1 सितंबर 2025 एवं पुनर्विचार याचिका में 29 मई 2026 को दिए गए निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियाँ हैं, जिनके कारण वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों एवं भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का यह स्थापित सिद्धांत है कि कोई भी नियम, अधिसूचना अथवा नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों तथा अर्जित सेवा-अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदण्डों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता तथा विधिक निश्चितता (Legal Certainty) के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता।
दिनांक 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया। इससे पूर्व देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदण्डों एवं चयन प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत रूप से की जा चुकी थीं। इन शिक्षकों ने वर्षों से राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक चेतना एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं का निस्तारण करते हुए पूर्व निर्णय को यथावत रखा है। न्यायालय के निर्णय का सम्मान करना हम सभी का संवैधानिक दायित्व है। साथ ही यह भी एक महत्वपूर्ण संवैधानिक तथ्य है कि न्यायपालिका विधि की व्याख्या करती है, जबकि जनहित में आवश्यक नीतिगत एवं विधायी समाधान उपलब्ध कराने का अधिकार संसद एवं सरकार के पास निहित है।
संगठन का मानना है कि…
देश के विभिन्न राज्यों में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवं उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय प्रभावी नियमों एवं पात्रताओं के अनुरूप पूर्णतः वैध थीं।
बाद में निर्धारित पात्रता अथवा योग्यता मानदण्डों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।
दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता एवं योगदान को समुचित महत्व दिया जाना चाहिए।
लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के भविष्य को अनिश्चितता में डालना शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता एवं शिक्षकों के मनोबल दोनों को प्रभावित करेगा।
संसद एवं केंद्र सरकार आवश्यक विधायी अथवा नीतिगत हस्तक्षेप कर इस वर्ग को उचित संरक्षण प्रदान कर सकती है।
किसी भी पात्रता मानदण्ड को पूर्व प्रभाव (Retrospective Effect) से लागू करने के प्रश्न पर न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के आलोक में पुनर्विचार अपेक्षित है।
अतः राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश ,उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह करता है कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों एवम् उतर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के संबंध में विशेष प्रावधान करते हुए उनके सेवा-अधिकारों, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा अन्य वैधानिक लाभों की रक्षा हेतु आवश्यक विधायी, नीतिगत अथवा प्रशासनिक कदम शीघ्र उठाए जाएँ।
एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र चौधरी ने लिया ज्ञापन
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष चंद्र दीप सिंह यादव ने बताया कि जिलाधिकारी कानपुर नगर की अनुपलब्धता को देखते हुए वहां के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र चौधरी को ज्ञापन सौंपा गया है. साथ ही समस्त शिक्षकों को आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री तक शिक्षकों द्वारा दिया गया ज्ञापन पहुंचा दिए जाएंगे.
बेसिक शिक्षकों का फूटा आक्रोश,उतरे TET अनिवार्यता के विरोध में.गजब की सरकार है,इन शिक्षकों की ज़ब नियुक्ति हुईं थी तब ये पूरी योग्यता रखते थे जो चाहिए थी,लेकिन सरकार नया नियम ले आई और पुराने शिक्षकों को अब ये योग्यता भी पूरीकरना अनिवार्य करदिया है,मतलब नौकरी छीनने का पूरा प्लान pic.twitter.com/hDmtS9xeg0
— Archana Sharma Shukla (@archanasharmas6) June 18, 2026
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