Karva Chauth-2022: करवा चौथ व्रत 13 अक्टूबर को, श्रीकृष्ण के कहने पर पाण्डवों की जीत के लिए द्रोपदी ने भी रखा था यह व्रत, देखें पूजन विधि और शुभ मुहूर्त, इस लेख में पढ़ें तीन कथा
करवा चौथ स्पेशल। सनातन धर्म की सुहागिनों का प्रिय त्योहार करवा चौथ इस बार 13 अक्टूबर को पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों ने इस बार उन सुहागिनों को व्रत रखने से परहेज करने को कहा है, जिनकी नई शादी हुई है और उनका पहला करवा चौथ है। क्योंकि इस बार शुक्र अस्त है। सनातन धर्म में जब भी तारा डूबा (गुरू या शुक्र अस्त) होता है तो किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत करने से बचा जाता है।
इसी के साथ आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने इस व्रत का उद्यापन करने वालों को भी इस बार उद्यापन करने से मना किया है। तो वहीं आचार्य ने सलाह दी है कि इस बार करवा चौथ का पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय रात 8.07 बजे होगा। इससे पहले प्रदोष बेला में 7.30 बजे तक पूजन कर सकते हैं।
आंगन में गाय के गोबर से लीपकर और स्वास्तिक बनाकर पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के एक घड़ी (24 मिनट) के भीतर ही चंद्र को अर्घ्य देकर और गौरी गणेश का पूजन कर चौथ माई के व्रत का पारण कर लेना उत्तम होगा। करवाचौथ के व्रत में शिव पार्वती, कार्तिकेय, श्रीगणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। बता दें कि कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है। इसे महिलाएं अपनी श्रद्धानुसार बिना जल पिए ही रखती हैं, जिसे निर्जला व्रत कहा जाता है। इस व्रत की पूजा आदि महिलाएं अपने परम्परागत तरीके से करती हैं।
पूजन विधि
आचार्य़ सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि चंद्रमा निकलने से कुछ समय पहले लकड़ी के एक पाटे पर कपड़ा बिछाएं या फिर बालू की बेदी बनाकर उस पर शिवती, पार्वती जी, कार्तिकेय जी और चंद्रमा की छोटी-छोटी मूर्तियां बना लें। अगर ऐसा न कर सकें तो बाजार में बिकने वाले करवा चौथ पूजन के छपे कैलेंडर ले लें। फिर पटरे के पास पानी से भरा लोटा और करवा रखकर करवा चौथ की कहानी सुनें अथवा पढ़ें। इससे पहले करवे पर रोली से एक सतिया बनाकर उस पर रोली से 13 बिंदियां लगाएं। इसके बाद हाथ में गेहूं के 13 दानें लेकर कथा सुनें। चांद निकलने के बाद अर्घ्य दें। इसके बाद बायना निकालकर सास, ननद या जिठानी को दें। इस व्रत को लेकर एक परम्परा ये भी है कि जिस वर्ष कन्या का विवाह होता है, उस वर्ष उसके पीहर से चौदह चीनी के करवों, बर्तनों, कपड़ों और गेहूं आदि का बायना भी आता है।
कथा-एक, पढ़ें द्रौपदी की कथा



कथा-दो



कथा तीन


DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)