शरद पूर्णिमा की रात खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परम्परा है. इसको लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में औषधीय गुण होते हैं।

विशाल स्वरूप और छांव वाला होता है उसी तरह से पति की उम्र भी विशाल होती है और पति स्वस्थ्य रहते हैं. इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के साथ ही अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर के लिए कर सकती हैं.

इस दिन पानी के घड़े, पंखे, खाँड के लड्डू, पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है। परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए।