भगत सिंह केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि…देश का पूर्ण विकास तब तक सम्भव नहीं जब तक…

September 28, 2026 by No Comments

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Bhagat Singh Jayanti: देहरादून में आज अखिल भारत नागरिक परिषद के तत्वावधान में “मजदूर आंदोलन और शहीद-ए-आजम भगत सिंह” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने कार्यक्रम का आयोजन किया। संगोष्ठी में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पीसी ध्यान और उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एके सिंह रहे।

इस मौके पर शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह केवल एक महान क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि मजदूरों, किसानों और शोषित वर्गों के अधिकारों के प्रखर विचारक भी थे। उनके क्रांतिकारी विचारों का एक महत्वपूर्ण पक्ष मजदूरों और किसानों को संगठित कर उन्हें राजनीतिक एवं सामाजिक परिवर्तन की शक्ति बनाना था।

Bhagat Singh Jayanti programमुख्य अतिथि पीसी ध्यानी प्रबन्ध निदेशक यूपीसीएल एंव पिटकुल ने कहा कि हमें शहीद भगत सिंह के सिद्धांतों पर चलते देश की प्रगति में अपना पूर्ण योगदान देना चाहिए और ऊर्जा के समस्त कार्मिकों द्वारा उत्तराखंड राज्य को पूर्ण ऊर्जा से आत्मनिर्भर करने का प्रण लिया गया।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि साइमन कमीशन के विरोध के दौरान लाला लाजपत राय पर हुए लाठीचार्ज और बाद में उनकी मृत्यु ने भगत सिंह और उनके साथियों को गहरे रूप से प्रभावित किया। इसके बाद भगत सिंह और राजगुरु ने ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जेपी सॉन्डर्स की हत्या कर लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला लेने का प्रयास किया।

ये थे भगत सिंह के विचार

सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि नौजवान भारत सभा का उद्देश्य युवाओं, मजदूरों और किसानों को संगठित करना तथा एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और शोषणमुक्त समाज की स्थापना के लिए संघर्ष करना था। भगत सिंह का स्पष्ट विचार था कि जब तक किसानों और मजदूरों को राजनीतिक सत्ता में वास्तविक भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का पूर्ण विकास संभव नहीं है।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि भगत सिंह के लिए राजनीतिक स्वतंत्रता का अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं था, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्वतंत्रता भी उसका अभिन्न हिस्सा थी। छोटी-छोटी आर्थिक मांगों और अधिकारों के लिए होने वाले संघर्ष मजदूरों को आगे चलकर अपने व्यापक राजनीतिक अधिकारों के प्रति जागरूक और संगठित करते हैं।

संयुक्त मोर्चा के संयोजक इंसारूल हक ने कहा कि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में मजदूर आंदोलनों के बीच “इंकलाब जिंदाबाद” का नारा संघर्ष और परिवर्तन की चेतना का प्रतीक बना हुआ है। भगत सिंह के विचार में इंकलाब का अर्थ केवल हिंसक परिवर्तन नहीं, बल्कि ऐसी सामाजिक व्यवस्था का निर्माण था जिसमें पुरानी शोषणकारी व्यवस्था समाप्त होकर एक बेहतर और न्यायपूर्ण व्यवस्था के लिए रास्ता तैयार हो।

उत्तरांचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी मजदूरों, किसानों और मेहनतकश जनता के अधिकारों तथा सामाजिक-आर्थिक न्याय के संघर्ष को नई दिशा देने वाले हैं।

कार्यक्रम में उत्तरांचल पावर इन्जीनियर्स एसोसिएशन से अध्यक्ष कार्तिकेय दुबे, महासचिव मुकेश कुमार, रेखा डंगवाल, सीके पाण्डेय, अमित रंजन, गौरव शर्मा, अमित शर्मा, अनिल मिश्रा, निशा रानी, मनीषा कौंसवाल, विवेक राजपूत, सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी, मोर्चा अध्यक्ष वाईएस तोमर, मोर्चा संयोजक इंशारूल हक़, सुनील मोघा, पंकज सैनी, अर्चित भट्ट, कल्पना डोभाल, सौरभ पाण्डेय, अरविंद कुमार, महेश रावत आदि संगठन के सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।

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