अन्नमयकोश से वृद्धि, बल, लोच, कुशलता, निरामयता, तितिक्षा जैसे गुणों का विकास होता है और माना जाता है कि हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन होता है.
अन्नमयकोश से वृद्धि, बल, लोच, कुशलता, निरामयता, तितिक्षा जैसे गुणों का विकास होता है और माना जाता है कि हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन होता है.