स्वयं का कार्य स्वयं करें और…जानें क्या है अन्नमय कोश और हमारे लिए कैसे है लाभकारी? भारत उत्थान न्यास का युवाओं को ये संदेश-Video

January 10, 2026 by No Comments

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Kanpur Bharat Utthan Nyas Panchkosha Campaign: देश के युवाओं के चरित्र निर्माण व सर्वांगींण विकास के लिए सामाजिक संगठन भारत उत्थान न्यास ने पंचकोश अभियान की शुरुआत की है. इस अभियान को लगातार सफलता मिल रही है और देश-विदेश से लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं. इसी क्रम में 11 जनवरी को राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन होने जा रहा है. 11 जनवरी को होने जा रही गूगल मीट में शाम को 7 बजे अन्नमयकोश (भोजन) का विकास विषय पर चर्चा होगी और देश-विदेश से जुड़े वक्ता इस विषय पर अपने विचार रखेंगे.

भारत उत्थान न्यास के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुजीत कुंतल ने बताया कि इस संगोष्ठी से कोई जुड़ना चाहे तो यू-ट्यूब चैनल https://www.youtube.com/@bun2219 से भी जुड़ सकता है. इसी के साथ ही उन्होंने बताया कि अन्नमय कोश क्या है?

जानें क्या है अन्नमय कोश?

सुजीत कुंतल ने बताया कि जगत में सभी जीवों का जीवन अन्न से है. मनुष्य, पशु, पक्षी, कीट, पतंग आदि की उत्पत्ति और पोषण अन्न पर निर्भर है. अन्न से ही इस जगत के सभी प्राणी उत्पन्न होते हैं, अन्न से इस जगत में सब दोष उत्पन्न हैं , गेहूं, चना, बाजरा, जौ, मक्का, दाल, यह सब पदार्थ अन्न कहे जाते हैं. इसे खाने से जीवन जीवित रहते हैं और बढ़ते हैं. अन्न से उत्पन्न और अन्न के आधार पर रहने के कारण शरीर को अन्नमयकोश (भोजन) कहा जाता है. अन्न से रस- रक्त, मांस-मेघ, अस्ति, मज्जा- शुक्राणु उत्पन्न होता है. अन्नमयकोश शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक- पौष्टिक आहार और उसका सम्यक पाचन साधन है.

अन्नमयकोश से वृद्धि, बल, लोच, कुशलता, निरामयता, तितिक्षा जैसे गुणों का विकास होता है और माना जाता है कि हम जैसा भोजन करते हैं वैसा ही हमारा मन होता है. इसलिए युवाओं को भोजन के मामले में बहुत ही सतर्क रहना चाहिए. ऐसा भोजन करें जिससे सोच अच्छी हो.

अन्नमयकोश का विकास

शारीरिक शिक्षा यानी खेल, व्यायाम, आसान, साइकलिंग, दौड़, चलना, कूदना, सूर्य नमस्कार से लिया जाता है तो वहीं स्वास्थ्य शिक्षा यानी नियमित स्वास्थ्य जांच, खान-पान अच्छी आदतें, फास्ट फूड एवं शीतल पदार्थों का परित्याग, पानी का प्रयोग, अन्न, जल और वायु का शुद्धिकरण श्रम कार्य यानी स्वयं का कार्य स्वयं करें और अच्छी नींद लें. इस तरह से हो जो भोजन करते हैं उससे हमारे शरीर व मन व मस्तिष्क का विकास होता है.

हर महीने होगी ई-संगोष्ठी

सुजीत कुंतल ने बताया कि अभियान को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक माह के प्रथम शनिवार या रविवार की शाम को एक राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा और प्रत्येक शनिवार व रविवार को एक कोश पर राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी का आयोजन निरंतर होगा.

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