Lucknow: लखनऊ में बनेगा गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क…जानें क्या होगा आकर्षण का केंद्र; LDA ने शुरू की तैयारी
Lucknow: लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) आने वाले 01 वर्ष में गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क विकसित करने जा रहा है। प्राधिकरण की अध्यक्ष/मण्डलायुक्त डॉ0 रोशन जैकब, जिलाधिकारी विशाख जी0, डीएफओ सितान्शु पाण्डेय, एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार व नगर आयुक्त गौरव कुमार ने शुक्रवार को स्थल पर पौधरोपण करके गोमती बायो-डायवर्सिटी पार्क के निर्माण की शुरूआत की। इस मौके पर जिला प्रशासन व प्राधिकरण के अन्य अधिकारियों ने भी पौधे लगाये।
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अवगत कराया कि प्राधिकरण ने सहारा ग्रुप को लीज पर दी गयी ग्रीन बेल्ट की 75 एकड़ जमीन वापस ली है। जिसमें से प्रथम चरण में 25 एकड़ क्षेत्रफल में 14 करोड़ रूपये की लागत से शहर का पहला बायो-डायवर्सिटी पार्क विकसित किया जाएगा। जिसके लिए दिल्ली में यमुना बायो-डाइवर्सिटी पार्क विकसित करने वाले वैज्ञानिकों का सहयोग लिया जा रहा है। एलडीए यह पार्क एक साल में तैयार करेगा।
दयाल पैराडाइज चौराहे से जनेश्वर मिश्र पार्क, गेट नंबर-5 के मध्य आकार ले रहे इस पार्क में बाउन्ड्रीवॉल, पार्किंग, इंट्री गेट, ऑफिस, पाथ-वे, किड्स प्ले-एरिया व वॉच टॉवर आदि बनाये जाएंगे। गोमती नदी के बेसिन में पाये जाने वाले पौधों की विभिन्न प्रजातियां, जो वर्तमान में विलुप्त होने की कगार पर हैं। उन्हें एकत्रित करते हुए पार्क में संरक्षित किया जाएगा। इसके अलावा देसी व प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करने के लिए पार्क में घास एवं झाड़ियों के साथ ही छायादार पेड़ लगाये जाएंगे। इसके अलावा फलदार बाग के साथ ही मेडिसिनल व बटरफ्लाई गार्डेन तैयार कराया जाएगा।
विद्यार्थियों को मिलेगी ये जानकारी
उपाध्यक्ष ने जानकारी दी कि पार्क में एनआईसी (नेचुरल इंटरप्रिटेशन सेंटर) बनाया जाएगा। सेंटर में फील्ड बायोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी, जो पार्क में घूमने आने वाले छात्र-छात्राओं को पौधों, पक्षियों, जीव-जंतुओं एवं कीट-पतंगों आदि की जानकारी देते हुए जैव विविधता से रूबरू कराएंगे। जिससे यह पार्क ईको-टूरिज्म के साथ ही शैक्षिक दृष्टि से भी अहम साबित होगा।
इस पद्धति से हुआ पौधरोपण
मण्डलायुक्त डॉ0 रोशन जैकब व जिलाधिकारी विशाख जी0 ने जैतून का पौधा रोपित किया। एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान मियावॉकी पद्धति से पौधे लगाये गये। इसमें पीपल, पिलखन, पाकड़, आम, नीम, जामुन, अमरूद, आवंला, कचनार, शीशम, अर्जुन, इमली व कैथा समेत विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किये गये।
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