Siddiqui Kappan: दो साल से लखनऊ जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को मिली जमानत, PFI से जुड़े होने का लगा है आरोप
लखनऊ। इंडिया में बैन हो चुके संगठन पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ) के साथ सक्रिय सदस्य के तौर पर जुड़े होने के आरोप में दो साल से लखनऊ की जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन को जमानत मिल गई. वह करीब 28 महीने बाद जेल से बाहर आए हैं.
जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए कहा कि, बहुत फाइट करने के बाद उनको रिहाई मिली है. वह अभी बहुत खुश हैं. इसी के साथ उनसे जब पीएफआई से कनेक्ट होने के आरोप में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह रिपर्टिंग करने के लिए गए थे और उनके साथ जो तीन लोग थे वह स्टुडेंट्स थे. इस दौरान कप्पन ने ये भी कहा कि उनको मीडिया का सपोर्ट मिला.
बता दें कि केरल के मलप्पुरम के निवासी, कप्पन 5 अक्टूबर, 2020 को उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक दलित महिला के सामूहिक बलात्कार और हत्या को कवर करने के लिए जा रहे थे, जब उन्हें तीन अन्य लोगों के साथ मथुरा टोल प्लाजा से गिरफ्तार किया गया था। उस समय पुलिस ने दावा किया था, कि कप्पन पीएफआई के सक्रिय सदस्य हैं और इलाके में कानून व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. इसी आरोप के बाद पत्रकार पर यूएपीए और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम सहित भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जेल में डाल दिया गया था. बाद में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय ने पीएमएलए मामले में बुक किया था.
इसके बाद वह करीब 28 महीने तक जेल में रहे. बुधवार को लखनऊ की सत्र अदालत ने कप्पन की रिहाई के आदेशों पर हस्ताक्षर कर दिए थे और गुरुवार सुबह वह लखनऊ जेल से बाहर आ गए. कप्पन के वकील इशान बघेल ने इसकी जानकारी मीडिया को दी. रिहाई आदेश में जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय शंकर पांडेय ने लखनऊ जेल अधीक्षक को कप्पन को रिहा करने का निर्देश दिया था, अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो. हालांकि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने 23 दिसंबर, 2022 को कप्पन को पीएमएलए मामले में जमानत दे दी थी.
न्यायमूर्ति डीके सिंह की एकल पीठ ने पत्रकार को जमानत दे दी, यह देखते हुए कि ईडी की जांच में कथित रूप से अब प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट द्वारा एकत्र किए गए 1.36 करोड़ के अवैध लेनदेन से संबंधित मामले में कप्पन की कोई विशेष भूमिका नहीं बताई गई है. 9 सितंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने भी गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन अधिनियम मामले में कप्पन को जमानत दे दी थी. हालांकि, लंबित पीएमएलए मामले के कारण वह जेल में उनको रहना पड़ा.
बता दें कि भारत में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ) पर केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सितम्बर 2022 में गैर कानूनी संगठन घोषित कर दिया था और पांच साल के लिए इसे बैन कर दिया था. इस संगठन पर भारत में आतंक फैलाने का भी आरोप है.