Govardhan Puja: संतान सुख के लिए गोवर्धन पूजा पर करें ये सरल उपाय… इन तीन बातों का रखें ध्यान

November 1, 2024 by No Comments

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Govardhan Puja: कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी दीपावली के तुरंत बाद गोवर्धन पूजा की जाती है. अगर तिथि का बढ़ रही है या अमावस्या दो दिन की है तो फिर दीवाली के एक दिन बाद भी गोवर्धन की पूजा होती है. इसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं. शास्त्रों औऱ वेदों की मानें तो इस दिन बलि की पूजा, गोवर्धन पूजा, गौ-पूजा, अन्नकूट होता है तो इस दिन वरूण, इन्द्र, अग्निदेव आदि देवताओं की पूजा का विधान है. एक बार देवराज इन्द्र ने कुपित होकर सात दिन तक मूसलाधार वर्षा कर दी लेकिन श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रज को बचा लिया तथा इंद्र को लज्जित होने के पश्चात् उनसे क्षमायाचना करनी पड़ी.

गोवर्धन पूजा प्रकृति के पूजन का प्रतीक है. भगवान श्रीकृष्ण ने सदियों पहले ही समझा दिया था कि इंसान तभी सुखी रह सकता है जब वह प्रकृति को प्रसन्न रखें. प्रकृति को ही परमात्मा मानें और परमात्मा के रूप में ही प्रकृति की पूजा करें, हर हाल में प्रकृति की रक्षा करें.

करें ये सरल उपाय

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि, इस दिन दूध, दही, शहद, शक्कर और घी से पंचामृत बनाएं और फिर उसमे गंगाजल और तुलसी मिलाकर शंख में भरकर भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें और फिर क्लीं कृष्ण क्लीं का 5 माला जाप करें। जाप के बाद पंचामृत घर के सभी सदस्य ग्रहण करें और संतान सुख के लिए कान्हा से प्रार्थना करें.

करें ये तीन काम

लक्ष्मी का एक रूप अन्नपूर्णा को भी माना गया है. मान्यता है कि जिस घर में मां अन्नपूर्णा स्थिर रूप से विराजमान होगी वहां सदैव स्थाई रूप से सुख-समृद्धि एवं शांति का वास होगा. इसलिए इस दिन सूर्योदय से पहलें उठकर सर्वप्रथम अपने घर में झाड़ू लगाएं वह भी घर के अन्दर से लेकर बाहर की ओर जिससे घर के सभी दरिद्रता व अशुभता बाहर निकल जाए और शुभता का प्रवेश हो.

झाड़ू निकल जाने के पश्चात् घर के बाहर से आपको थाली बजाते-बजाते घर में प्रवेश करना है. कुछ इस तरह भाव करें जिस तरह मां लक्ष्मी आपके घर पधार रही है.

फिर स्नानादि से निवृत होकर गोबर या मिट्टी लेकर घर के मुख्य द्वार के चौखट पर छोटा पर्वत और पाल बनाकर उन्हें गोवर्धन स्वरूप मानकर उनकी पूजा-अर्चना करें. फिर केसर-कुंकुम का तिलक करें, अक्षत चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाए व नैवेद्य स्वरूप कोई भी प्रसाद भोग लगाएं. इसके बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें की हमारे घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास बना रहे व उनकी कृपा दृष्टि और आशीर्वाद हमेशा स्थापित रहे.

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)

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