बेसिक शिक्षा में नहीं खत्म हो रहा कमीशनबाजी का खेल…स्टाफ से तंग आकर प्रधानाध्यापक ने पी लिया जहर; भाई ने किया ये बड़ा खुलासा
Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में लगातार बेसिक शिक्षा विभाग से भ्रष्टाचार की खबरें सामने आती रही हैं. कभी मिड डे मिल में खेल तो कभी ड्रेस के मामले में घोर कमीशनबाजी की खबरें अखबारों में प्रकाशित होती रही हैं. हालांकि शासन ने भ्रष्टाचार के खेल को खत्म करने के लिए बहुत से हथकंडे अपनाए लेकिन वो सब लगातार फेल होते दिखाई दे रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण अमरोहा से सामने आया है.
यहां प्राथमिक विद्यालय निरयावली भूड़ के प्रधानाध्यापक वैभव गुप्ता ने विभागीय व्हाट्सअप ग्रुप में एक आरोप भरा पोस्ट शेयर कर कीटनाशक पी लिया. हालांकि उनको जल्द ही अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनकी हालत में सुधार बताया जा रहा है.
शुक्रवार को वैभव गुप्ता ने ग्रुप में लिखा कि ‘स्टाफ के नन्हें सिंह, हेमराज कोहली और अजीत सिंह से परेशान होकर मैं बीआरसी चंदनपुर खादर में अपनी जान दे रहा हूं. ये तीनों लोग काफी समय से बहुत परेशान कर रहे हैं. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है. अलविदा साथियों.’ प्रधानाध्यापक की इस पोस्ट से साफ जाहिर होता है कि आखिरकार भ्रष्टाचार की जड़ें किस तरह से बेसिक शिक्षा विभाग में फैली हुई हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैभव गुप्ता सैदनगली के रहने वाले हैं और वे पिछले 8 साल से प्रथामिक विद्यालय निरयावली भूड़ में प्रधानाध्यापक के तौर पर नियुक्त हैं. दरअसल विद्यालय में पिछले 2 महीने से दो कमरों का निर्माण हो रहा था. इसी को लेकर कहा जा रहा है कि निर्माण कार्य में कमीशन को लेकर स्टाफ वैभव गुप्ता पर दबाव बना रहा था और वह इससे बहुत परेशान थे. यही वजह है कि उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की.
इस सम्बंध में वैभव गुप्ता के भाई मुदित गुप्ता ने मीडिया के सामने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि वैभव कमीशन मांगने वालों से परेशान था. वह एक महीने से अधिकारियों से शिकायत कर रहे थे लेकिन उनकी नहीं सुनी गई. अगर आरोपियों पर पहले ही कार्रवाई हो जाती तो मेरे भाई परेशान होकर ये घातक कदम नहीं उठाते. अगर मेरे भाई को कुछ हो गया तो हम सब बर्बाद हो जाएंगे. पूरा घर उजड़ जाएगा. वहीं प्रधानाध्यापक के पिता ने रहरा थाने में आरोपी शिक्षकों के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि जिला बेसिक शिक्षाधिकारी मोनिका ने शिक्षक हेमराज और नन्हें सिंह को सस्पेंड कर दिया है तो वहीं शिक्षामित्र अजीत सिंह को स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है. दूसरी ओर जिलाधिकारी निधि गुप्ता ने जिला बेसिक शिक्षाधिकारी, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता गौरव रंजन और डिप्टी कलेक्टर की तीन सदस्यीय टीम बनाकर जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
वहीं इस पूरे मामले में जिला बेसिक शिक्षाधिकारी ने कहा कि पहले भी इस मामले में विवाद हुआ था लेकिन खंड शिक्षाधिकारी ने दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर अपने स्तर से सुलझा दिया था. फिलहाल अब मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
तो वहीं इस पूरे मामले में सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर प्रधानाध्यापक द्वारा विभाग से पहले की गई शिकायत पर तीनो आरोपियों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई. तो वहीं सवाल ये भी खड़ा होता है कि आखिर स्टाफ की इतनी हिम्मत कहां से आ गई कि वे खुलेआम प्रधानाध्यापक पर कमीशन का दबाव बनाने लगे?
फिलहाल इसी तरह तमाम अन्य बिंदु पर जांच की जरूरत है और कड़ी कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि फिर से इस तरह की घटनाएं सामने न आ सके या किसी प्रधानाध्याक को जान देने की कोशिश न करनी पड़े. इसी के साथ ही शासन स्तर पर भी बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर जांच बैठानी चाहिए.
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