Chhath Puja-2025: नहाए खाए के साथ आज से 4 दिवसीय छठ महापर्व का शुभारम्भ…PM मोदी ने दी बधाई-Video
Chhath Puja-2025: पूर्वांचल का लोकप्रिय व्रत-त्योहार छठ पूजा हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. इसे सूर्य षष्ठी कहते हैं. इस बार यह तिथि 27 अक्तूबर को पड़ रही है. इस दिन व्रती महिलाएं शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी तो वहीं 28 अक्तूबर की सुबह उदय होते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करेंगी. बता दें कि इस व्रत में व्रती महिलाएं 36 घंटे तक बिना पानी पिए व्रत रखती हैं.
छठ के पहले दिन नहाए खाए के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्रतियों को बधाई दी है. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा है,’नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ आज से चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो रहा है। बिहार सहित देशभर के श्रद्धालुओं को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन!’
नहाय-खाय के पावन अनुष्ठान के साथ आज से चार दिवसीय महापर्व छठ का शुभारंभ हो रहा है। बिहार सहित देशभर के श्रद्धालुओं को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। सभी व्रतियों को मेरा नमन और वंदन!
— Narendra Modi (@narendramodi) October 25, 2025
संतान के लिए रखा जाता है ये व्रत
यह व्रत संतान की लम्बी आयु के लिए किया जाता है. इसी के साथ ही घर-परिवार की सुख-समृद्धि व पति के दीर्घायु होने की कामना भी व्रती महिलाएं करती हैं. तो वहीं आज से इस चार दिवसीय व्रत का शुभारम्भ नहाय-खाय के साथ हो रहा है. मान्यता है कि छठ मइया की पूजा करने से साल भर घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और घर धन-धान्य से भरा रहता है. इस व्रत से निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है.
कल होगा खरना
सोशल मीडिया पर अखिल भारतीय पुरोहित महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बिहपुर प्रखंड के सोनवर्षा निवासी पंडित संजय झा का बयान वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने छठ महापर्व की जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 25 अक्तूबर को नहाय-खाय यानी कद्दू भात से छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान शुरू हो जाएगा. इसके बाद 26 अक्तूबर को खरना होगा. शाम को व्रती महिलाएं गुड़ की खीर यानी रसियाउर खाकर 36 घंटे का निर्जला व्रत का शुभारम्भ करेंगी.
उन्होंने आगे बताया कि खरना पूजन कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को होता है और फिर षष्ठी तिथि (27 अक्टूबर) की शाम को छठ घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण किया जाएगा तो वहीं 28 अक्टूबर 2025 दिन मंगलवार को प्रात: बेला में उदीयमान आदित्य देव को अर्घ्य अर्पित कर व्रती महिलाएं घाट पर ही व्रत का पारण करेंगी.
कठिन है नियम
बता दें कि छठ पर्व के दौरान किए जाने वाले नियम जितने सात्विक हैं, उतने ही कठिन भी. इसकी पूजा के लिए जो भी पकवान बनता है उसे घर पर ही बनाया जाता है. इन सभी पकवानों को गैस-चूल्हा पर नहीं बल्कि मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी या गोबर के उपले जलाकर बनाया जाता है. यानी पूरी तरह से शुद्धता का ध्यान रखा जाता है. अनुष्ठान से पहले ही छठ व्रतियों द्वारा महापर्व छठ व्रत का प्रसाद बनाने के लिए गेहूं व अरवा चावल को अच्छे से धोकर व साफ कर घर की आंगन व छतों पर धूप में बैठकर सुखाया जाता है और फिर कई दिनों पहले से ही घरों की साफ-सफाई के साथ पूजा की तैयारी की जाती है.
मालूम हो कि नहाय-खाय के साथ ही व्रती के घरों में तब तक लहसुन-प्याज का खाना नहीं बनता जब तक व्रत का पारण नहीं हो जाता. यानी व्रती महिलाओं के साथ ही घर के जितने भी लोग हैं वो सभी बिना लहसुन-प्याज का ही खाना खाते हैं. मतलब सभी सात्विक रूप से रहते हैं.आज रात से व्रती महिलाएं जमीन पर ही शयन करेंगी और घर के अन्य लोग भी बेड पर नहीं सोते. आज के दिन व्रती भोजन में कद्दू या लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल आदि बनाती हैं जो कि बिना लहसुन-प्याज के बनता है.
इस व्रत की मुख्य बात ये है कि शुद्धता और सात्विकता का पूरा ध्यान रखा जाता है.
चारो तरफ भक्तिमय माहौल
बता दें कि छठ पूजा का महापर्व शुरू हो चुका है. इसको लेकर घाटों पर एक अलग ही रौनक दिखाई दे रही है. छठ की बेदी बनाई जा रही है और लोग घाटों की साफ-सफाई में लगे हुए हैं. घाटों को लाइट्स से सजा दिया गया है. चारो तरफ छठ मइया के गीत गूंज रहे हैं.
DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।
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