Assam News: क्या अब CM हिमंत बिस्वा सरमा लगा देंगे लव जिहाद पर टोटल ब्रेक…? विधानसभा में पास करा लिया UCC बिल

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Assam News: असम में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को विधानसभा ने एक मैराथन बहस और विपक्ष के भारी हंगामे के बीच मंजूरी दे दी है. यानी इस नए कानून के लागू होने के बाद असम में अब बहुविवाह यानी पॉलीगैमी और लव जिहाद जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. साथ ही लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वालों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना जरूरी होगा.

असम बना तीसरा राज्य

असम में इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद तीसरा ऐसा राज्य बन गया है जहां यूसीसी लागू कर दिया गया है. इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस निर्णय को अपनी सरकार की सबसे बेहतरीन शुरुआत कहा है और इसे महिलाओं के सम्मान के प्रति एक बड़ी श्रद्धांजलि बताया है.

उन्होंने सदन में चर्चा के बीच ये भी कहा कि किसी भी परिस्थिति में महिलाओं की गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि, क्योंकि आर्थिक उतार-चढ़ाव तो चलते रहते हैं लेकिन एक बार खोई हुई गरिमा वापस नहीं पाई जा सकती.

अब करना होगा रजिस्‍ट्रेशन

बता दें कि यूसीसी लागू होने के बाद असम में अब तलाक, शादी और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील पारिवारिक मामलों में धर्म से ऊपर उठकर एक समान कानून की वकालत की गई है. हालांकि सरकार ने राज्य की अनूठी सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखने के लिए अनुसूचित जनजातियों (ST) को इस कानून के दायरे से पूरी तरह से बाहर रखा है.

बहुविवाह पर लगा पूरी तरह से प्रतिबंध

तो वहीं इस नए प्रावधानों के लागू होने के बाद असम में बहुविवाह पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है. तो वहीं अगर इसका उल्लंघन कोई करता है तो सात साल तक की कैद का कड़ा प्रावधान भी किया गया है. इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण भी कराना अब कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाएगा. अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उसे तीन महीने तक की जेल की सजा हो सकती है.

हालांकि यूसीसी को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध भी किया है. कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने इस विधेयक को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और केवल राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया कदम बताया है और ये भी कहा है कि अनुसूचित जनजातियों को इस दायरे से छूट देकर यूसीसी को पूरी तरह से फॉलो भी नहीं किया जा रहा है. फिर भला क्या इसके मायने रह जाएंगे? .

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