Shakuntala University का 13वां दीक्षांत समारोह 31 जुलाई को…कुलपति ने गिनाई दो वर्षों की उपलब्धियां

July 29, 2026 by No Comments

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Shakuntala University:  डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय (Dr. Shakuntala Mishra National Rehabilitation University) का 13वां दीक्षांत समारोह इस बार 31 जुलाई को मनाया जाएगा. इसकी जानकारी के लिए आज कुलपति आचार्य संजय सिंह ने प्रेसवार्ता की और इस दौरान अपने कार्यकाल के दो वर्षों की उपलब्धियां भी गिनाई.

बता दें कि कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बुधवार को कुलपति ने बताया कि 13वें दीक्षांत समारोह में कुल 1,919 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की जाएंगी। इनमें 955 छात्राएं और 964 छात्र शामिल हैं, जबकि 17 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी जाएगी। समारोह में 130 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 156 पदक प्रदान किए जाएंगे। इनमें 76 स्वर्ण, 40 रजत और 40 कांस्य पदक शामिल हैं।

स्वर्ण पदकों में 32 छात्राओं को 41 तथा 25 छात्रों को 35 स्वर्ण पदक मिलेंगे। रजत पदकों में 22 छात्राओं को 24 और 14 छात्रों को 16 रजत पदक दिए जाएंगे। वहीं कांस्य पदकों में 24 छात्राओं को 26 तथा 13 छात्रों को 14 कांस्य पदक प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने कुल 45 पदक अर्जित किए हैं। इनमें 22 स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक शामिल हैं। इन 27 विद्यार्थियों में 13 छात्राएं और 14 छात्र हैं। कुलपति ने कहा कि यह विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा व्यवस्था का सकारात्मक परिणाम है।

ई-गवर्नेंस को बनाया गया है प्रभावी

प्रेसवार्ता में कुलपति ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियां भी गिनाईं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में ई-गवर्नेंस को प्रभावी बनाया गया है और समर्थ पोर्टल के माध्यम से शैक्षणिक एवं प्रशासनिक गतिविधियों का लगातार विस्तार किया गया है। विश्वविद्यालय में दिव्यांग और सामान्य विद्यार्थी एक ही कक्षा में अध्ययन करते हैं तथा सामान्य विद्यार्थी भी दिव्यांग साथियों की हरसंभव सहायता करते हैं। पिछले दो वर्षों में संकाय सदस्यों की ओर से 60 शोध परियोजनाएं विभिन्न एजेंसियों को भेजी गई हैं।

दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए असिस्टिव टेक्नोलॉजी पर लगातार कार्य किया जा रहा है। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए स्क्राइब-फ्री परीक्षा की व्यवस्था लागू की गई, जिसके तहत उन्होंने स्वयं 35-35 पृष्ठ लिखकर परीक्षा दी। उनकी सुविधा के लिए एआई आधारित स्मार्ट चश्मे भी उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और समावेशी समाज का निर्माण करना भी है। साथ ही विश्वविद्यालय की उपलब्धियों के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इस दौरान कुलसचिव रोहित सिंह, परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार मिश्रा, अधिष्ठाता शैक्षणिक प्रो. वीके सिंह, निदेशक शोध एवं विकास प्रो. अश्विनी कुमार सिंह, विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. यशवंत वीरोदय सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

16 महाविद्यालय हैं सम्बद्ध

कुलपति ने आगे बताया कि विश्व में अपनी गौरवमयी उपस्थिति दर्ज कराता यह एशिया का एक ऐसा विशिष्ट विश्वविद्यालय है जहाँ दिव्यांग एवं गैर-दिव्यांग विद्यार्थियों को एक साथ समावेशी शिक्षा प्रदान की जाती है। यह विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बाधारहित अवस्थापना सुविधाओं से सुसज्जित है। वर्तमान में नवसृजित 02 संकाय, भेषज विज्ञान संकाय (फैकेल्टी आॅफ फ़ार्मास्यूटिकल सांइसेज) एवं अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय (फैकेल्टी आफॅ इंजीनियरिंग एण्ड टेकनोलॉजी) और 02 विभागों संस्कृत विभाग एवं योग विभाग सहित कुल 10 संकाय और 35 विभाग संचालित हैं। विश्वविद्यालय द्वारा वर्तमान में 16 महाविद्यालय/संस्थान सम्बद्व हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान

विश्वविद्यालय निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। पिछले एक वर्ष में डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने अपनी पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर पुख्ता किया है। भारत सरकार की नियामक संस्था भारतीय पुनर्वास परिषद् द्वारा डॉ० शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ को राष्ट्रीय स्तर पर सेंटर फॉर एक्सीलेंस घोषित किया गया।

15 संस्थानों से किया एमओयू

वर्तमान में शोध सहयोग, सॉफ्टवेयर विकास, कौशल संवर्द्धन कार्यक्रम, डेटा विश्लेषण, इनोवेटिव आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन आदि ज्ञान विज्ञान के प्रमुख क्षेत्रो में सहयोग हेतु इस वर्ष 15 संस्थानों से एम.ओ.यू. क्रियान्वित किए गए।
विश्वविद्यालय नेे नेचर इंडेक्स रैंकिंग 2025 में 162वें और ओवरऑल रिसर्च आउटपुट रैंकिंग में दूसरे स्थान पर अपनी जगह बनाई है। इसके अलावा रसायन विज्ञान में 139वां और बायोलॉजिकल साइंस में 59वां स्थान लाकर विश्वविद्यालय ने अपनी अकादमिक गुणवत्ता और शोध क्षमता को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति

कुलपति ने आगे बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय ने शिक्षा को बहुआयामी दृष्टिकोण से पुनर्परिभाषित किया है। वर्ष 2025-26 विश्वविद्यालय में सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया सुनिश्चित की गई। सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश ने न केवल पारदर्शिता और समान अवसर सुनिश्चित किए, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय से जोड़ने का मार्ग भी प्रशस्त किया।

औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप पाठ्यक्रम निर्माण, निरंतर बढ़ती अकादमिक गतिविधियों तथा बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित सेवायोजन कार्यक्रमों के कारण विश्वविद्यालय में आवेदनों की संख्या में लगभग दो गुना वृद्धि हुई है। विद्यार्थियों के बीच बढ़ती लोकप्रियता के परिणामस्वरूप इस वर्ष स्नातक एवं परास्नातक स्तर पर 2788 सीटों के सापेक्ष 5946 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत संगीत एवं योग विभाग में 02 नए प्रोग्राम आरम्भ करने के साथ ही 56 नये मल्टीडिस्पेनरी कोर्स एवं 01 कौशल संवर्धन कार्यक्रम प्रारम्भ किए गए। जिससे हमारे प्रोग्राम एवं कोर्सेज़ में भी वृद्धि हुई है।

समर्थ पोर्टल से जुड़ा

विश्वविद्यालय द्वारा ऑनलाइन सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन प्रणाली लागू की गई है, विद्यार्थी 75 प्रतिशत उपस्थिति के उपरांत ही अपना परीक्षा प्रवेश पत्र ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। इससे छात्रों में नियमित कक्षा उपस्थिति के प्रति गंभीरता बढ़ी है और अकादमिक अनुशासन सुदृढ़ हुआ है। परीक्षा फॉर्म, फीस जमा, उपस्थिति प्रमाणन, प्रवेश पत्र और परिणाम – सभी प्रक्रियाओं को समर्थ पोर्टल से जोड़कर विश्वविद्यालय ने डिजिटल और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे छात्रों को सुविधा और समय की बचत दोनों मिल रही है।

55 यूपी महिला एनसीसी बटालियन की है मान्यता

वह आगे बोले कि इसके अतिरिक्त अब विश्वविद्यालय में मूल्यांकित उत्तर-पुस्तिकाएँ विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले दिखाई जाती हैं। इस व्यवस्था से चुनौती मूल्यांकन में उल्लेखनीय कमी आई है और परीक्षा परिणाम भी शीघ्र, पारदर्शी और विवाद-मुक्त रूप से घोषित हो रहे हैं। विश्वविद्यालय में 55 यूपी महिला एनसीसी बटालियन की मान्यता प्राप्त होना संस्थागत विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इसके माध्यम से छात्राओं को राष्ट्रसेवा, नेतृत्व, अनुशासन और सामाजिक दायित्व का संगठित मंच प्राप्त हुआ।

सुगंध पथ योजना

विश्वविद्यालय द्वारा चलाई जा रही “सुगंध पथ” योजना सबसे मानवीय और नवाचारी पहलों में से एक है। इसके अंतर्गत परिसर के प्रमुख मार्गों, विभागों, पुस्तकालय, छात्रावास और प्रशासनिक भवनों के आसपास सुगंधित पौधे लगाए गए। इन पौधों की विशिष्ट खुशबू के आधार पर दृष्टिबाधित विद्यार्थी अपने मार्ग और गंतव्य की पहचान कर सकते हैं। सुगंध पथ का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को स्वतंत्र आवागमन, आत्मनिर्भरता और गरिमा का अनुभव कराता है।

स्मार्ट विजन चश्मा

विश्वविद्यालय द्वारा तकनीकी सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी कदम उठाते हुए दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को “स्मार्ट विजन चश्मा” उपलब्ध कराया गया है। यह चश्मा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कैमरा सेंसर और ऑडियो सिस्टम से युक्त है, जो आसपास मौजूद वस्तुओं, रास्तों, सीढ़ियों, दरवाजों और बाधाओं की पहचान कर उपयोगकर्ता को वॉइस अलर्ट देता है। इसके अतिरिक्त यह चश्मा टेक्स्ट रीडिंग, साइन बोर्ड पहचान, चेहरे की पहचान और ऑब्जेक्ट डिटेक्शन जैसी सुविधाएँ भी प्रदान करता है, जिससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को पुस्तक पढ़ने, नोट्स समझने और कक्षा में सक्रिय भागीदारी में अभूतपूर्व सहायता मिलती है। यह तकनीक इस विचार को साकार करती है कि तकनीक विलासिता नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और मानव गरिमा का सशक्त माध्यम है।

लैपटॉप आधारित परीक्षा

विश्वविद्यालय में परीक्षा प्रणाली में अभिनय प्रयोग करते हुए दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए सह-लेखक विहीन लैपटॉप आधारित परीक्षा का सफल आयोजन संपन्न हो रहा है जो विश्वविद्यालय की समावेशी सोच को दर्शाता है। बी.ए. पंचम सेमेस्टर के दो छात्रों ने एनवीडीए स्क्रीन रीडर की सहायता से स्वयं परीक्षा दी, जिससे तकनीक को समान अवसर का माध्यम बनाने की दिशा में एक नया उदाहरण स्थापित हुआ है।
रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेल की स्थापना तथा प्रोजेक्ट एवं कंसल्टेंसी गाइडलाइन के प्रभावी क्रियान्वयन से विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को नई दिशा मिली।

विश्वविद्यालय के रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेल लगभग 26 प्रोजेक्ट आईसीएसएसआर (भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार जैसी प्रतिष्ठित अनुदान एजेंसियों को भेजे जा चुके हैं। यह पहल शोध संस्कृति को मजबूत करने और शिक्षकों को नवाचार के लिए प्रेरित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वश्वविद्यालय में रिसर्च पब्लिकेशन भी बढ़ रहें हैं।

प्रदान किए जा रहे हैं नि:शुल्क अंग

दिव्यांगों के भौतिक पुनर्वासन एवं दिव्यांगजनों को निःशुल्क अंग प्रदान किए जाने हेतु विश्वविद्यालय में ‘कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केन्द्र’ स्थापित है। पिछले एक साल में 1504 दिव्यांगों सहित अब तक इस के्रन्द्र द्वारा अब तक 6647 दिव्यांगों को निःशुल्क कृत्रिम अंग एवं उपकरण प्रदान किये गये हैं। यह केन्द्र दिव्यांगजनों को उत्तम एवं नवीन तकनीक पर आधारित सुविधा प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। इस दिशा में केन्द्र ने दो नवीन ईकाई, जिसमें आधुनिक माड्यूलर कृत्रिम अंग तथा आधुनिक विपाटन (स्पिल्ंिटग) तकनीक की सुविधा दिव्यांगजनों हेतु प्रारम्भ की गई है। 3डी प्रिन्टिंग तकनीक से कृत्रिम अंग एवं प्रत्यंग का निर्माण कर दिव्यांगजनों को बेहतर सुविधा प्रदान करते हुए दिव्यांगता के क्षेत्र में उन्नत अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने पहल कर दी है।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय में स्थापित डेफ कॉलेज द्वारा श्रवण बाधितों, ऑटिस्टिक बच्चों, सेरिब्रल पाल्सी से ग्रसित बच्चे एवं विभिन्न टवपबम क्पेवतकमते के मरीजों हेतु नैदानिक सेवायें भी प्रदान की जा रही है. नैदानिक सेवाओं के माध्यम से, अब तक कुल 4049 श्रवण बाधितों का इलाज हो चुका है। प्रति माह लगभग 450-600 बच्चों की स्पीच लैंग्वेज थेरेपी संचालित होती है।

स्पोर्ट्स पॉलिसी

विश्वविद्यालय की स्पोर्ट्स पॉलिसी और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के फलस्वरूप इस वर्ष में विद्यार्थियों ने प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुल 64 पदक जीतकर विश्वविद्यालय को गौरवान्वित किया। विशेष रूप से पैरा खेलों में विद्यार्थियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक सशक्तिकरण और आत्मबल को भी समान महत्व देता है।

वर्षों से प्रतीक्षित शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, जिसमें अब तक 32 शिक्षक लाभान्वित हो चुके हैं। इसके साथ ही 11 शिक्षकों की सीधी भर्ती द्वारा नियुक्ति की गई है। पदोन्नति और नियुक्ति की यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय की अकादमिक गुणवत्ता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विश्वविद्यालय ने विभागों को लैब संचालन, शैक्षणिक गतिविधियाँ, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप, सेमिनार और शैक्षणिक भ्रमण के लिए बजट आवंटित कर प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को बढ़ावा दिया है। 16 विभागों को लैब संचालन हेतु 1-1 लाख रुपये, जबकि 29 विभागों को कॉन्फ्रेंस एवं सेमिनार के लिए 50-50 हजार तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए 10-10 हजार रुपये प्रदान किए गए हैं। देश के किसी भी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग हेतु दो साल में एक बार रूपये 20,000/- की धनराशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है।

विदेशों में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रतिभाग हेतु चार वर्ष में एक बार रूपये 1,00000/- की धनराशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही शोधार्थी को पूरे शोध के दौरान संगोष्ठी में प्रतिभाग किये जाने हेतु रूपये 20,000/- की धनराशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था विभागों को आत्मनिर्भर और सक्रिय बनाने की दिशा में एक व्यावहारिक पहल है।

ब्रेल पुस्तकालय का आरम्भ

विश्वविद्यालय ने पिछले 01 सालों में कई महत्वपूर्ण आयाम गढे़ हैं। 04 जनवरी, 2026 को ब्रेल लिपि के जनक लुई ब्रेल की जयंती के अवसर पर स्वामी विवेकानंद केंद्रीय पुस्तकालय में उत्तर प्रदेश के पहले ब्रेल पुस्तकालय का शुभारम्भ हुआ। उत्तर प्रदेश का यह इकलौता ऐसा राज्य विश्वविद्यालय है, जहाँ ब्रेल पुस्तकालय स्थापित किया गया है। विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित किये गये उत्तर प्रदेश के पहले राज्य स्तरीय ब्रेल पुस्तकालय में विवि के ही ब्रेल प्रेस से प्रकाशित स्नातक एवं परास्नातक के 54 पाठ्यक्रमों के लिए एनईपी आधारित उच्च शिक्षा की 5500 से अधिक ब्रेल पुस्तकें हैं, जिसमें बाहरी दृष्टि दिव्यांग भी आकर पढ़ाई कर रहे हैं।

ब्रेल लिपि में समाचार पत्र प्रकाशित

विश्वविद्यालय का अपना समाचार पत्र तो प्रकाशित हो ही रहा है इस वर्ष दिव्यांग विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिनाईयों को देखते हुए ब्रेल लिपि में भी समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारम्भ कर दिया गया है। वर्तमान में 530996 ब्रेल पृष्ठ मुद्रित हुए हैं। मुझे यह जान कर अत्यन्त प्रसन्नता है कि देश की सेवा करने वाले सैनिकों का पुनर्वसन हमारी सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।

विश्वविद्यालय करने जा रहा है यह बड़ा काम

डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय अब जल, थल और वायु सेना के साथ मिलकर सैनिकों के पुनर्वसन के क्षेत्र में कार्य करने जा रहा है। तीनों सेनाओं से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों और युद्ध या अन्य कारणों से दिव्यांग हुए सैनिकों के पुनर्वसन के लिए विश्वविद्यालय और सेना के मिलिट्री हाॅस्पिटल, मेरठ के बीच सहयोग की दिशा में दिनाॅक 25 जून, 2026 को समझौता पत्रक पर हस्ताक्षर करते हुए एक ठोस पहल शुरू हुई है, जिसके तहत विश्वविद्यालय का कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र युद्ध या किसी अन्य कारणों से अपना अंग खो चुके सैनिकों के लिए कृत्रिम अंग बनाकर दिव्यांग सैनिकों को मुफ्त कृत्रिम अंग मुहैया कराएगा।

कृत्रिम अंगों का किया जा रहा है निर्माण

इसी के साथ सिपेट के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर सहमति बनी है, जिसे शीघ्र ही औपचारिक रूप दिया जाएगा। इसके बाद विश्वविद्यालय का कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र, जो अभी तक कृत्रिम अंगों के पुर्जे खुले बाजार से खरीदता था, उन्हें अब स्वयं निर्मित कर सकेगा। विवि और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सिपेट) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) होना प्रस्तावित है। इसके बाद विवि में सिपेट के सहयोग से कृत्रिम पैर का पंजा सहित अन्य भाग (पार्ट्स) की निर्माण प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

दिया जा रहा है रोजगार

विश्वविद्यालय निरंतर प्रयासरत है कि इस संस्थान से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार एवं आजीविका के अवसर सुलभ हों। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए विश्वविद्यालय में सेवायोजन एवं रोजगार प्रकोष्ठ (प्लेसमेंट सेल) सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों का केंद्रीय, राज्य एवं अन्य सेवाओं जैसे उच्च शिक्षा, न्यायिक सेवा तथा निजी क्षेत्र में चयन हुआ है। ’प्लेसमेंट सेल द्वारा’ इस बार 175 विद्यार्थियों को कुल 257 सेवायोजन प्रस्ताव (जाॅब आफर) प्राप्त हुए जिनमें 16 दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए थे। इस बार का अधिकतम पैकेज 13.36 लाख था, जो एम.बी.ए की छात्रा आयुषी मिश्रा को जारो एजुकेशन, मुम्बई द्वारा प्रदान किया गया।

इनको मिला सफल प्लेसमेंट

विशेष रूप से 16 दिव्यांग विद्यार्थियों का सफल प्लेसमेंट विश्वविद्यालय के सामाजिक उद्देश्य की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया। यह उपलब्धि न केवल विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रमाणित करती है, बल्कि उस सोच को भी सशक्त करती है कि दिव्यांगता कोई सीमा नहीं, बल्कि एक अलग प्रकार की क्षमता है, जिसे यदि सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले, तो वह समाज की मुख्यधारा में अत्यंत प्रभावी भूमिका निभा सकती है।

1919 विद्यार्थियों को दी जा रही है उपाधि

विश्वविद्यालय के इस त्रयोदश दीक्षांत समारोह में 1919 विद्यार्थियों को उपाधियों से विभूषित किया जा रहा है, उपाधि प्राप्तकर्ताओं में 955 छात्राएं एवं 964 छात्र हैं। इस बार के दीक्षांत समारोह में मेधावियों को 156 पदकों से अलंकृत किया जा रहा है। कुल 156 पदकों में 27 दिव्यांग विद्यार्थियों ने कुल 45 पदक प्राप्त किये हैं जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है ।

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