UP Education News: विधान परिषद में शिक्षक विधायक ने इंटरमीडिएट शिक्षा संशोधन अधिनियम 2022 का किया प्रबल विरोध, कहा “उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के इतिहास में है ये काला दिन”, उठाई ये महत्वपूर्ण मांगें
लखनऊ। वर्तमान में चल रहे विधान परिषद के द्वितीय सत्र में सरकार द्वारा रखे गए इंटरमीडिएट शिक्षा संशोधन अधिनियम 2022 का प्रबल विरोध करते हुए नेता निर्दल समूह एवं शिक्षक विधायक कानपुर खंड निर्वाचन क्षेत्र राजबहादुर सिंह चंदेल ने इसे उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के इतिहास में काला दिन बताया।
वित्तविहीन मान्यता की धारा7 (क क) को 1987 में 2 वर्ष के लिए प्रावधान किया गया था तथा सरकार द्वारा इन्हें ग्रांट इन एड में लेने का आश्वासन दिया गया था किंतु पेश किए गए उक्त अधिनियम में मान्यता की धारा 7 (क क) को 7 (4) मैं परिवर्तित कर हमेशा के लिए वित्तविहीन विद्यालयों को ग्रांट इन एड में लिए जाने के प्रावधान को समाप्त कर दिया इससे निर्बल आय वर्ग के अभिभावकों के लिए अपने बच्चों को शिक्षा दिला पाना कठिन हो जाएगा। यह विद्यालय अब उत्तर प्रदेश चयन बोर्ड सेवा नियमावली 1982 एवं वेतन वितरण अधिनियम 1971 से आच्छादित नहीं हो पाएंगे यह संविधान की मूल मूल भावना एवं लोक कल्याण की व्यवस्था के विपरीत है और जनता के हित में नहीं है।
इस मौके पर चंदेल ने वित्तविहीन शिक्षकों को यात्रा, स्वास्थ्य सेवा विस्तार एवं राज्य पुरस्कार में समानता के अधिकार की भी मांग की। सदन में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का मुद्दा भी राजबहादुर सिंह चंदेल ने उठाया और सरकार से मांग की कि विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की आमेलन की पूर्व की सेवाओं को जोड़ते हुए भविष्य निधि पेंशन लाभ सहित अन्य परिणामी लाभ दिया जाये। यह जानकारी डा0 सत्येन्द्र कुमार शुक्ल मंडलीय अध्यक्ष उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ कानपुर मंडल ने एक विज्ञप्ति में दी।