Karva Chauth-2022: शादी के बाद का पहला करवा चौथ व्रत इस बार नहीं रख सकेंगी सुहागिनें, अस्त है शुक्र, जानें कौन-कौन से शुभ कार्य हो रहे हैं प्रभावित, देखें कितने बजे होगा चंद्र दर्शन

October 8, 2022 by No Comments

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लखनऊ। कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को हिंदू धर्म की सुहागिनों का सबसे लोकप्रिय त्योहार करवा चौथ ( Karva Chauth) होता है। इस बार यह निर्जला व्रत 13 अक्टूबर 2022 को पड़ रहा है।

इस मौके पर सुहागिने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु के लिए पूजा-पाठ करेंगी, लेकिन इस बार का करवा चौथ वे सुहागिनें नहीं रख सकेंगी, जिनकी हाल ही में शादी हुई है और यह उनका पहला करवा चौथ है, क्योंकि इस बार शुक्र ग्रह अस्त चल रहा है। सनातन धर्म में शुक्र व गुरु ग्रह के अस्त होने पर कोई भी मांगलिक कार्य का शुभारम्भ नहीं किया जाता है। इसी में एक है करवा चौथ।

आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री ने बताया कि 20 नवंबर तक शुक्रास्त का मान रहेगा। इसलिए करवा चौथ का व्रत की शुरुआत करने वाली महिलाएं इस व्रत को नहीं रख सकेंगे। बता दें कि शुक्र ग्रह को प्रेम, विवाह, संतान व सुख के साथ ही वैभव देने वाला भी बताया गया है। इसीलिए इसके अस्त होने के कारण पहली बार किए जाने वाले किसी भी मांगलिक कार्य को करना निषेध माना गया है।

इस बार व्रती व्रत का उद्यापन भी नहीं कर सकेंगी
आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी बताते हैं कि करवा चौथ के व्रत का उद्यापन 16 वर्ष में किया जाता है, लेकिन इस बार शुक्र अस्त होने के कारण करवा चौथ का उद्यापन भी नहीं किया जा सकेगा, लेकिन सुहागिनें व्रत रखकर चंद्रमा को अर्घ्य दे सकती हैं और व्रत का पारण भी सकती हैं। वैसे अधिकांश महिलाएं इस व्रत को ताउम्र रखती हैं।

जानें शुक्र अस्त के दौरान क्या-क्या नहीं होंगे शुभ कार्य
आचार्य विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि 20 नवंबर तक शुक्र अस्त का मान रहेगा। इस दौरान सभी मांगलिक व शुभ कार्य नहीं होंगे। इस दौरान मुंडन, गृहप्रवेश, विवाह आदि शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। मान्यता है कि शुक्र ग्रह के अस्त होने से प्रेम, सुख, धन और वैवाहिक जीवन पर बड़ा असर पड़ता है। इसीलिए शुक्र और गुरु के अस्त होने पर मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। आचार्यों की सलाह है कि जो सुहागिनें पहली बार करवा चौथ की व्रत रखने जा रही हैं, वो इस बार से व्रत की शुरुआत न करें। फिलहाल इस सम्बंध में महिलाएं अपने आचार्यों से भी सलाह ले सकती हैं।

जानें कब निकलेगा चांद
आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी बताते हैं कि 13 अक्टूबर को चतुर्थी शाम 5:45 से 6:59 बजे तक रहेगी। इस दौरान पूजन का शुभ मुहूर्त है। इस बार करवा चौथ में चांद का पूजन विशेष फलदायी होगा। चंद्रमा का पूजन करने से पति और बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय रात 8.07 बजे होगा। इससे पहले प्रदोष बेला में 7.30 बजे तक पूजन कर सकते हैं। चतुर्थी 13 को सुबह 3:01 से शुरू होकर 14 अक्टूबर को 5:43 बजे तक रहेगी। आचार्य पुष्पलता पाण्डेय बताती हैं कि धातु से बने करवा से चौथ का पूजन करना अधिक फलदायी रहता है लेकिन यथा शक्ति मिट्टी के करवे से पूजन भी किया जा सकता है।