Ajmer Dargah: वहां था शिव मंदिर…अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका मंजूर, अब इस तारीख को होगी अगली सुनवाई; साक्ष्य के तौर पर पेश की गई ये किताब
Ajmer Dargah: संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के बीच उठी हिंसा की आग अभी शांत भी नहीं हुई थी कि खबर सामने आ रही है कि अब अजमेर स्थित ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह के शिव मंदिर होने का दावा किया गया है. इस केस में मंगलवार को सुनवाई हुई और हिंदू पक्ष ने साक्ष्य के तौर पर एक किताब को कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया व एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग) सर्वे की मांग की है. यह किताब 1910 में पब्लिश हुई थी जिसमें दावा किया गया है कि यहां पर मंदिर था.
ये दावा हिंदू सेना की तरफ से किया गया है और किताब का हवाला देकर दरगाह की जगह भगवान शिव का मंदिर होने का दावा किया गया है. फिलहाल मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को कोर्ट ने 27 नवंबर की तारीख तय की थी. तो वहीं आज सुनवाई करते हुए अजमेर शरीफ दरगाह को शिव मंदिर बताने वाली याचिका को निचली अदालत ने स्वीकार कर लिया है और मामले की अगली सुनवाई 20 दिसंबर को होगी. यह मामला अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़ा है. अगर इस केस में सर्वे का आदेश आता है, तो संभल मस्जिद के बाद यहां भी सर्वे किया जा सकता है.
अजमेर दरगाह की जगह पर मंदिर था, इस पर अलग-अलग कई दस्तावेज कोर्ट में पेश किए गए हैं और पुरजोर तरीके से मांग की गई है कि अजमेर दरगाह का एएसआई से सर्वे कराया जाए और दरगाह की मान्यता रद्द कर हिंदू समाज को मंदिर में पूजा अर्चना का अधिकार दिया जाए. इस केस को लेकर विष्णु गुप्ता ने मीडिया को बताया कि उन्हें उम्मीद है कि 27 नवंबर को 11:00 बजे इस मामले में उनके पक्ष में फैसला आएगा. दरगाह के पक्षकारों को नोटिस जारी कर सर्वे की मांग पूरी होगी. इसके बाद सभी के सामने स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन अब कल न्यायालय तय करेगा कि यह बात चलने लायक है या नहीं इसे लेकर तैयारी की जा रही है.
ये रखी गई है मांगें
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने इस मामले में याचिका दायर करते हुए दावा किया है कि अजमेर दरगाह भगवान श्री संकटमोचन महादेव विराजमान मंदिर है. इसीलिए इसे मंदिर ही घोषित किया जाए. इसी के साथ मांग की गई है कि दरगाह समिति के अनाधिकृत अवैध कब्जे को हटाया जाए और इसका एएसआई सर्वे कराया जाए. इसी के साथ ही याचिका में मंदिर में पूजा-पाठ करने की अनुमति भी मांगी गई है.
हर विलास शरदा की पुस्तक का दिया गया हवाला
अजमेर ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह को शिव मंदिर बताने का दावा करने के लिए साक्ष्य के तौर पर 1910 में हर विलास शारदा की पुस्तक को कोर्ट में पेश किया गया है. इस पुस्तक में यहां पर मंदिर होने के प्रमाण दिए गए हैं. मंगलवार को अजमेर सिविल न्यायालय पश्चिम में सुनवाई की गई. जहां न्यायालय ने वाद चलने और नहीं चलने को लेकर 27 नवंबर की तारीख तय की है. इस केस को हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता की ओर कोर्ट में रखा गया है और दावा किया गया है कि अजमेर दरगाह पहले हिंदू संकट मोचन मंदिर हुआ करता था.