AKTU Convocation Ceremony: उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे हैं शोध व नवाचार कार्य, छात्र अब नौकरी देने वाले बनें, देखें और क्या कहा प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने
लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) के 20वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर जहां एक ओर शिक्षामंत्री ने मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामना दी तो वहीं मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को नौकरी के पीछे भागने के लिए मना करते हुए कहा कि अब छात्र नौकरी देने वाले बनें।
छात्र अब नौकरी देने वाले बनें
इस दौरान दीक्षांत भाषण देते हुए मुख्य अतिथि जायडस लाइफसाइंस के चेयरमैन पंकज आर पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के छात्र सिर्फ नौकरी के बारे में क्यो सोचते हैं। अब समय आ गया है कि इस विचार से छात्र बाहर निकलें और नौकरी देने वाले बनें। छात्रों को उद्यमिता और नवाचार के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। तभी वह खुद का और प्रदेश के विकास में योगदान दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों को लक्ष्य बनाकर उन पर रणनीतिक तरीके से चलना होगा। यह समय कुछ नया करने का है। बताया कि जब तक आप नया नहीं सृजित करेंगे तब तक पहचान नहीं बनेगी।
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा है शोध कार्य
विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश में उच्च शिक्षा के माहौल में सकारात्मक परिवर्तन आया है। शोध और नवाचार में तेजी से कार्य हुए हैं। इसी का नतीजा है कि प्रदेश के विश्वविद्यालय नैक की रैंकिंग में ए प्लस प्लस आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राविधिक शिक्षा भी आगे बढ़ रही है। नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव किये जा रहे हैं। ऐसे में सभी को मिलकर कार्य करने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने मेडल प्राप्त छात्र-छात्राओं को शुभकामना दी।

जल का करें संरक्षण
मालूम हो कि किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज या किसी भी संस्थान में किसी भी कार्यक्रम की शुरूआत दीप प्रज्जवलित कर किया जाता है, लेकिन 20वें दीक्षांत समारोह पर एकेटीयू ने दीप प्रज्ज्वलित करने के बजाए कलश स्थापना की और राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल व कुलपति प्रदीप कुमार मिश्र द्वारा जल भरा गया। कुलपति ने बताया कि इसका संदेश जल संरक्षित करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि अगर आज हम जल संरक्षित नहीं करेंगे तो आने वाले समय में हमारी पीढ़ियां जल की समस्या से जूझेंगी। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने प्रयासों से पानी बर्बाद न करें।