Ayodhya Ram Mandir: “हम एंटी मोदी नहीं, लेकिन…”, राम मंदिर उद्घाटन को लेकर चंपत राय पर नाराज दिखे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, देखें बयान का पूरा वीडियो

January 9, 2024 by No Comments

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Ramlala Pran Pratishtha: अयोध्या में 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन होना है और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होने जा रही है, लेकिन इससे पहले ही मंदिर को लेकर सियासत तेज हो गई है. एक ओर जहां विपक्षी दल निमंत्रण को लेकर लगातार मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर निशाना साध रहे हैं तो दूसरी ओर उनके एक बयान के बाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ ने आड़े हाथों लिया है और कहा है कि उनको मंदिर से त्यागपत्र देकर मंदिर को रामानन्द सम्प्रदाय को सौंप देना चाहिए.

बता दें कि बीते दिनों चंपत राय ने बयान दिया था और बताया था कि राम मंदिर रामानन्द परम्परा का है. उन्होंने कहा था कि, ‘राम का मंदिर… रामानंद परंपरा… बस. मंदिर रामानंद संप्रदाय का है. इसी के साथ उन्होंने कहा कि यह मंदिर शैव शाक्त और संन्यासियों का नहीं है. इसी के साथ ही उन्होंने रामानन्द सम्प्रदाय के बारे में बताया कि, अयोध्या में रामलला की रामानंद संप्रदाय का पालन करते हुए पूजा की जाती है. रामलला के श्रंगार से लेकर उनका भोजन, स्नान, वस्त्र और देखभाल उसी तरह की जाती है, जैसे किसी बालक की जाती है. इसी के बाद अब मंदिर को रामानन्द सम्प्रदाय को सौंपे जाने का मुद्दा उठ रहा है. ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ ने चंपत राय के इसी बयान के बाद प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि रामलली की प्रतिष्ठा के पूर्व रामानन्द सम्प्रदाय को मन्दिर सौंपे रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट.

शास्त्रीय परम्परा का नहीं किया जा रहा है अनुसरण
इसी के साथ ही ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शास्त्रीय परंपराओं का अनुसरण नहीं किया जा रहा. भारत में राजा और धर्माचार्य हमेशा से ही अलग रहे हैं, लेकिन अब राजा को ही धर्माचार्य बनाया जा रहा है। यह भारतीय परंपराओं के विरुद्ध है। वह 22 जनवरी को होने वाले श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या नहीं जाएंगे।

धर्म की स्थापना धर्माचार्यों
बता दें कि शंकराचार्य वृंदावन से पंजाब जाते समय रविवार देर रात सोनीपत में वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित अशोक शर्मा के आवास पर एक दिन के प्रवास के लिए पहुंचे थे. शुक्रवार को पंजाब की ओर प्रस्थान करने से पहले उन्होंने मीडिया से बात की और कहा कि भारतीय परंपरा में सदैव से ही राजा राज करते रहे हैं और धर्म की स्थापना की जिम्मेदारी धर्माचार्यों पर छोड़ी जाती है।
इसी के साथ आगे कहा कि, वर्तमान समय में इन परंपराओं का निर्वहन नहीं किया जा रहा। अब राजा को ही धर्माचार्य माना जा रहा है। इसके तहत अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में तय किया गया है कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शन करेंगे। उनके जाने के बाद धर्माचार्यों को दर्शन के लिए भेजा जाएगा जो पूर्णतया गलत है।

सनातन धर्म ही देश को एक बनाए रखता है
आगे उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की विशेषता है कि वह देश को एक रखता है। उत्तर और दक्षिण को एक बनाए रखने वाला केवल सनातन धर्म ही है। भाषा, खान-पान सब अलग है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम पूरा भारत एक है। कहीं का भी पंडित बुला लीजिए एक ही वेद मंत्र का पाठ करेंगे। बेशक वह जीवन में कभी मिले ही नहीं हो। एक ही शास्त्र का अनुसरण किया जाएगा।

मस्जिद के ढांचे को तोड़ना न्याय विधान के तहत नहीं था, हिंदुओं को…
महाराज ने आगे कहा कि, मस्जिद के ढांचे को तोड़ना भी न्याय विधान के तहत नहीं था। हिंदुओं को खुश करने के लिए ही इसे तोड़ा गया था जबकि न्याय विधान के तहत इसे प्राप्त किया जाना चाहिए था। जिस समिति ने केस जीता उसे बाद में हटा दिया गया और नई समिति बना दी गई, जो न्यायसंगत नहीं है।

अधूरे निर्माण कार्य में प्राण प्रतिष्ठा नहीं है उचित
इसी के साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी मंदिर में निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले प्रवेश या प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती। प्राण प्रतिष्ठा तभी संभव है जब उसका निर्माण कार्य पूरा हो जाए। अयोध्या में फिलहाल गर्भगृह का फर्श बनाकर उस पर पिलर खड़े कर दिए गए हैं। मंदिर का पूर्ण निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे में प्राण प्रतिष्ठा उचित नहीं है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि, हम एंटी मोदी नहीं है लेकिन एंटी शास्त्र भी नहीं होना चाहते.