Chhath Puja : साक्षात भगवान हैं सूर्य देव…इसलिए कल शाम अर्घ्य देने से पहले जरूर करें ये काम

October 26, 2025 by No Comments

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Chhath Puja: पूर्वांचल का लोकप्रिय व्रत-त्योहार हर साल कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है. चार दिवसीय छठ महापर्व में व्रती महिलाएं व पुरुष 36 घंटे का निर्जला व्रत रखते हैं. इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. व्रती महिलाएं सूर्य षष्ठी के दिन शाम को नदी घाटों पर एकत्र होकर छठी बेदी पर पूजा करती हैं और अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं.

इस दौरान सूप या भी टोकरी में मौसमी फल व सब्जियों के साथ घर के बने पकवान रखकर व्रती महिलाएं नदी में खड़ी होती हैं और भोग लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं. यह एकमात्र ऐसा व्रत है जिसमें डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है फिर इसके दूसरे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है. इस दौरान 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है.

मान्यता है कि छठी मइया का पवित्र व्रत रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही सारे दुर्भाग्य समाप्त हो जाते हैं। इस व्रत से निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है।

मनोकामना होगी पूर्ण

भारतीय ज्योतिष अनुसन्धान संस्थान के निदेशक आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि छठ पूजा पर मुख्य रूप से भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। सनातन धर्म में सूर्य को साक्षात भगवान माना गया है, क्योंकि वे रोज हमें दर्शन देते हैं और उन्हीं के प्रकाश से हमें जीवनदायिनी शक्ति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, रोज सूर्य की उपासना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तो वहीं सूर्य षष्ठी यानी छठ पर्व पर सूर्य देव को अर्घ्य देने से पहले अगर सूर्याष्टक का पाठ किया जाए तो व्रत और भी फलदायी होगा.

छठ के दिन करें ये कार्य

छठ की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठकर शौच आदि कार्यों से निवृत्त होकर नदी के तट पर जाकर आचमन करें तथा सूर्योदय के समय शरीर पर मिट्टी लगाकर स्नान करें। इसके बाद पुन: आचमन कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और सप्ताक्षर मंत्र- ॐ खखोल्काय स्वाहा से सूर्यदेव को अर्घ्य दें। इसके बाद भगवान सूर्य को लाल फूल, लाल वस्त्र व रक्त चंदन अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं तथा पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं। अंत में हाथ जोड़कर सूर्यदेव से प्रार्थना करें। इसके बाद नीचे लिखे श्री शिव प्रोक्तं सूर्याष्टकं’ शिव प्रोक्त सूर्याष्टक का पाठ करें-मान्यता है कि सूर्याष्टक का पाठ करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सफलता मिलती है. सूर्याष्टक का पाठ प्रतिदिन भी किया जा सकता है.

आदि देव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर:।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तुते ।1।
सप्ताश्वरथ मारुढ़ं प्रचण्डं कश्यपात्पजम्।
श्वेत पद्मधरं तं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ।2।
लोहितं रथमारुढं सर्वलोक पितामहम्।
महापाप हरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम् ।3।
त्रैगुण्यं च महाशूरं ब्रह्मा विष्णु महेश्वरं।
महापापं हरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम् ।4।
वृहितं तेज: पुञ्जच वायुराकाश मेव च।
प्रभुसर्वलोकानां तं सूर्य प्रणमाम्यहम् ।5।
बन्धूक पुष्प संकाशं हार कुंडल भूषितम्।
एक चक्र धरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ।6।
तं सूर्य जगत् कर्तारं महातेज: प्रदीपनम्।
महापाप हरं देवं तं सूर्य प्रणमाम्यहम् ।7।
तं सूर्य जगतां नाथं ज्ञान विज्ञान मोक्षदम्।
महापापं हरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ।8।
सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं गृहपीड़ा प्रणाशनम।
अपुत्रो लभते पुत्रं दरिद्रो धनवान भवेत ।9।
अभिषं मधु पानं च य: करोत्तिवे‍दिने।
सप्तजन्म भवेद्रोगी जन्म-जन्म दरिद्रता ।10।
स्त्री तेल मधुमां-सा नित्य स्त्यजेन्तु रवेद्रिने।
न व्या‍धि: शोक दारिद्रयं सूर्यलोकं सगच्छति ।11।

‘इति श्री शिव प्रोक्तं सूर्याष्टकं’

DISCLAIMER: यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।

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