रास्ते पर सन्नाटे का पहरा है…IAS पद से इस्तीफा देने के कई दिन बाद दिव्या मित्तल ने तोड़ी चुप्पी; Video जारी कर बताई नई योजना

September 29, 2026 by No Comments

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Divya Mittal: हाल ही में IAS पद से इस्तीफा देकर चर्चा में आने वाली दिव्या मित्तल का ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वह उत्तर प्रदेश कैडर में साल 2013 बैच के जरिए भारतीय प्रशासनिक सेवा में आई थीं. इस्तीफे के बाद उन्होंने चुप्पी तोड़ते हुए जनता के कई सवालों के जवाब दिए हैं.

दरअसल त्यागपत्र के बाद से उनके अगले कदम को लेकर कई सवाल उठ रहे थे. इसी के बाद उन्होंने एक ताजा वीडियो जारी कर तमाम सवालों के जवाब देकर अपनी रणनीति जगजाहिर कर दी है. इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट पर वीडियो जारी कर उन्होंने कहा कि ”कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे लेकिन अब अपनी बात को इस वीडियो में कह दिया है. अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो इस पोस्ट पर कमेंट करिए, या 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए.

बनना चाहती हूं लोगों की आवाज

द‍िव्‍या म‍ित्‍तल इसी वीडियो में आगे कहती हैं कि लोगों ने मुझसे पूछा क‍ि वे सबकुछ तो बन गई अब और क्‍या बनना चाहती हैं? इस पर वह कहती हैं कि मेरा जवाब है क‍ि वे राजनीत‍ि में आकर लोगों की आवाज बनना चाहती हैं. ज‍िनकी आवाज क‍िसी ऑफिस तक नहीं पहुंच पाती वह उनकी आवाज बनना चाहती हैं. मुझे उन लोगों की तरफ से अपने देश की आजादी के 80 सालों का जवाब चाह‍िए.

इसी के साथ ही दिव्या मित्तल ने कहा कि वह हौसला जुटा रही थीं.

 

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मेरा सिर शर्म से झुक गया था

वह बताती हैं कि जब वह मिर्जापुर में तैनात थीं…वह कहती हैं, एक बार मैं लहरिया देह (म‍िर्जापुर का एक गांव) की पहाड़ी पे पानी पहुंचाने के लिए निरीक्षण करने पहुंची थी. तभी एक महिला मेरी ओर आने लगी. मुझे लगा उसे कुछ चाहिए होगा शायद पेंशन या पक्का मकान लेकिन जब उन्होंने कहा कि यहां पर कक्षा पांच तक ही स्कूल हैं और इसके बाद यहां के बच्चों की पढ़ाई बंद हो जाती है. यह सुनकर मेरा सिर शर्म से झुक गया. आजादी के 80 सालों तक पहाड़ पर एक अच्छा स्कूल तक नहीं पहुंचा सके. वह आगे कहती हैं कि मैंने नियम देखे स्कूल स्वीकृत कर दिया और आज 3 साल हो जाने के बाद वो स्कूल बनना शुरू नहीं हुआ.

वह सवाल करती हैं और कहती हैं कि अब मुझे बताइए कि क्या नहीं था? पैसा नहीं था, नियम नहीं था, स्वीकृति नहीं थी? था तो बस इरादा नहीं था. वह कहती हैं कि अगर इरादा होता तो पहाड़ भी रास्ता दे देता लेकिन इरादा नहीं था तो एक फाइल ही पहाड़ बन गई. वह कहती हैं कि मुझे उन गायब स्कूलों का हिसाब चाहिए.

उनकी इन बातों से जाहिर होता है कि वह किसी बड़ी रणनीति के साथ आगे बढ़ रही हैं और उत्तर प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कुछ नया और बड़ा देखने को मिल सकता है. दरअसल जनता बेहद परेशान है, महंगाई, अच्छी शिक्षा व्यवस्था का न होना, लड़कियों के लिए असुरक्षित समाज, भ्रष्टाचार आदि चरम पर है. पढ़े लिखे युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. अपराध दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है.

 

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