Lucknow: लैंगिक समानता बनाने में भूमिका निभायेंगे जेंडर चैंपियन, AKTU की बड़ी तैयारी, जानें क्या है ये
Lucknow: लैंगिक समानता लाने के लिए डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) अपने सभी संबद्ध संस्थानों में जेंडर चैंपियन बनायेगा। संस्थानों में बनाये जाने वाले जेंडर चैंपियन लैंगिक समानता का माहौल बनाने के साथ ही छात्राओं के सम्मान को बनाये रखने में अपनी भूमिका निभायेंगे। इसके लिए सभी संस्थानों को कुलपति प्रो0 जेपी पांडेय के निर्देश पर कुलसचिव की ओर से पत्र जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि सभी संस्थान अपने यहां जेंडर चैंपियन बनायें। दरअसल, शिक्षा मंत्रालय की ओर से शिक्षण संस्थानों में लैंगिक समानता लाने के लिए यह पहल की गयी है। इसे लागू करने के लिए यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों को इसे लागू करने का निर्देश दिया है।
छात्र ही बनेंगे जेंडर चैंपियन
संस्थानों को अपने यहां पढ़ने वाले 16 वर्ष से अधिक उम्र वाले छात्र या छात्रा को बतौर जेंडर चैंपियन बनाना होगा। इसके लिए बाकायदा चयन प्रक्रिया होगी। संबंधित संस्थान के प्रमुख चयन करेंगे। चयन के लिए छात्र या छात्रा को उसी संस्थान में पंजीकृत होना होगा। उम्र 16 वर्ष या उससे अधिक होना चाहिए। साथ छात्र नियमित रूप से संस्थान में उपस्थित रहता हो। इसके अलावा उसमें बोलने, लिखने और प्रेजेंटेशन की क्षमता होनी चाहिए। साथ ही सामाजिक सांस्कृतिक मुद्दों और लैंगिक समानता की अच्छी समझ होना चाहिए। वहीं नेतृत्व क्षमता में जरूरी है। चयनित जेंडर का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। कार्यकाल पूरा होने पर संस्थान की ओर से उसे प्रशस्ति प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।
रहेंगी ये जिम्मेदारियां
जेंडर चैंपियंस को अपने संस्थान में लैंगिंक समानता और छात्राओं के सम्मान के लिए कई तरह की गतिविधियों को कराना होगा। उसे विभिन्न मुद्दों पर ग्रुप डिस्कशन, वाद-विवाद प्रतियोगिता पोस्टर प्रतियोगिता आदि आयोजित कराना होगा। जिसमें की संस्थान के छात्र-छात्राएं हिस्सा ले सकें। साथ ही उसे जेंडर चैंपियन क्लब का प्रचार प्रसार भी करना होगा। इसके लिए उसे नयी चीजें करनी होंगी। वेबसाइट बनाकर या ब्लॉग पर लैंगिंक समानता पर लेख लिखना होगा। साथ ही ऐसे महिला पुरूषों के बारे में बताना होगा जिन्होंने इस मुद्दे पर समाज में अपना अहम योगदान दिया हो। साथ ही लैंगिंक समानता विषय पर फिल्म फेस्ट का आयोजना कराना होगा। वहीं, कार्यशाला, थीम आधारित प्ले, पेंटिंग प्रतियोगिता कराकर सभी छात्र-छात्राओं की भागीदारी कराना होगा। जबकि संस्थान में पुलिस और महिला हेल्पलाइन नंबर के प्रति जागरूकता का माहौल बनाना होगा। वहीं सरकारी योजनाओं की भी जानकारी देना पड़ेगा। वहीं जेंडर चैंपियन को संस्थान की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। विशेषज्ञ लैंगिंक समानता को बनाये रखने के लिए विभिन्न पहलुओं से उन्हें अवगत करायेंगे।
CAS में किया गया योग
डा० ए० पी० जे० अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के शोध संस्थान सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज में निदेशक प्रो० वीरेंद्र पाठक, एवं डा० अनुज कुमार शर्मा के नेतृत्व में योगाभ्यास का आयोजन किया गया। इस आयोजन में संस्थान के सभी छात्र/छात्राओं, संकाय सदस्यों, एवं संसथान के सभी कर्मचारी एवं अधिकारीयों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की शुरुआत संसथान के सहायक कुलसचिव शिवम् गुप्ता के द्वारा किया गया। इस अवसर पर डा० अनुज कुमार शर्मा के द्वारा योग के महत्व के बारे में कुलाधिपति महोदया द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन के क्रम में व्याख्यान दिया।
नैनो टेक्नोलॉजी पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज की ओर से आयोजित नैनोटेक्नोलाजी फॉर मॉडर्न ऍप्लिकेशन्स पर आधारित दो दिवसीय कार्यशाला का शुक्रवार को हुआ। कार्यशाला में नैनोटेक्नोलॉजी प्रतिभागियों को नवीनतम अनुसंधान और विकास के बारे में जागरूक किया गया। इस मौके पर कुलपति प्रो0 जे० पी० पांडेय ने कहा कि इस तरह के आयोजन से छात्रों को विभिन्न विषयों के बारे में गहरायी से जानने का मौका मिलता है जो काफी फायदेमंद है।
वहीं, सेंटर फॉर एडवांस्ड स्टडीज के निदेशक प्रो0 वीरेंद्र पाठक ने कहा कि कार्यशाला के आयोजन से छात्र नैनोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दक्ष होंगे। जो उनको भविष्य में काफी काम आयेगा।नाइस थिंग्स कम इन स्माल पैकेजेस- इस वाक्य का व्याख्यान करते हुए डा० सौरभ मिश्रा एवं डा० ए० वी० उल्लास ने वर्तमान में टेक्नोलॉजिकल कॉम्पेक्शन पर प्रकाश डाला।
आधुनिकता के इस दौर में स्मार्ट फ़ोन्स के डेवलपमेंट में नैनोवायर ग्रास का प्रयोग कैसे स्मार्टफोन्स को किसी भी प्रकार के प्रकाश से चार्ज किया जा सकता ह। नैनो फाइबर का उपयोग फलों की पैकेजिंग में किया जा सकता है जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जा सके। नैनोट्यूब्स का इस्तेमाल कर के सोलर सेल की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। बैटरी एवं सुपर कपैसिटर में ननोमाटेरिअल का उपयोग कर उसकी चार्जिंग एवं डिस्चार्जिंग प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकता है। उक्त बिंदुओं पर कार्यशाला में वृस्तृत जानकारी प्रदान कराई गई जिससे छात्र/छात्राओं में नैनोटेक्नोलाजी के प्रति उत्सुकता का संचार हुआ और वो लोग शोध में अपनी प्रतिभागिता दर्ज कराने हेतु प्रतिबद्धता जाहिर की। छात्र/छात्राओं को सुरक्षित रूप से नैनो संश्लेषण एवं विशेषीकरण के आधुनिक उपकरणों का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।