Haryana Election-2024: हरियाणा में कांग्रेस को कांग्रेस ने ही दी पटखनी! जानें कैसे?

October 8, 2024 by No Comments

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Haryana Assembly Election-2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा जीत का जश्न मना रही है तो वहीं कांग्रेस अपनी हार का मंथन करने में जुटी है. इसी बीच राजनीतिक जानकारों की एक रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें कांग्रेस की हार की वजह पार्टी के अंदर मौजूद अंतर्कलह को बताया जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा में चुनावी कैंपेन की शुरुआत तो कांग्रेस ने पुरजोर तरीके से की थी लेकिन फिर पार्टी के अंदर मचे घमासान का सच भी धीरे-धीरे सामने आने लगा था.

राजनीतिक जानकारों ने कांग्रेस की हार को लेकर रिपोर्ट में कहा है कि पूरे चुनाव के दौरान एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का खेमा था तो दूसरी ओर रणदीप सुरजेवाला के समर्थक. तो वहीं अगर किसी की नाराजगी की चर्चा सबसे अधिक रही तो वह हैं सांसद कुमारी शैलजा. इस चुनाव को दौरान उनके भी समर्थक अलग-थलग ही नजर आए. पहले तो वह काफी वक्त तक पार्टी के चुनाव प्रचार से दूर रहीं और फिर जब चुनाव प्रचार में शामिल भी हुईं तो पूरी तरह से बेमन तरीके से. यही वजह रही कि चुनाव परिणाम कांग्रेस के दावों के एकदम विपरीत आए.

शैलजा के मन के मुताबिक नहीं हुआ टिकट का बंटवारा

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी की तरफ से टिकट बंटवारे में कुमारी शैलजा की बात नहीं मानी गई, जिससे पार्टी के दलित वोट बैंक में नाराजगी दिखी. तो दूसरी ओर पार्टी के तमाम ऐसे नेता जो टिकट की आस लगाए बैठे थे. उनको जब टिकट नहीं मिली तो वो भी कांग्रेसे से छिटक गए और दूसरी पार्टी का दामन थाम लिया या फिर निर्दलीय ही मैदान में उतर गए और कांग्रेस के खिलाफ खड़े हो गए. तो इसी के साथ ही कुमारी शैलजा विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट बंटवारे में भूपेंद्र सिंह हुड्डा कैंप के दबदबे की वजह से नाराज रहीं और ये तक कह दिया था कि उनकी भूपेंद्र हुड्डा से बातचीत नहीं होती है। यही नहीं हरियाणा के चुनाव में प्रचार के दौरान ही भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा और रणदीप सुरजेवाला तक खुद के सीएम बनने की इच्छा जाहिर कर चुके थे. मालूम हो कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा दो बार राज्य के सीएम रह चुके हैं और तीसरी बार के लिए वह अपनी फिल्डिंग पूरी तरह से सजाकर बैठे हुए थे।

चुनाव परिणाम आने के दो दिन पहले से ही दिल्ली में डेरा जमाए थे ये नेता

तो दूसरी ओर दलित और महिला कार्ड खेलकर और पार्टी आलाकमान से नजदीकी बढ़ाकर कुमारी शैलजा भी सीएम की कुर्सी पर नजर गड़ाए बैठी थीं. तो वहीं चुनाव परिणाम आने से ठीक दो दिन पहले से ही कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा दिल्ली में डेरा डाल कर बैठे हुए थे. दोनों में से कोई भी चुनाव परिणाम के साथ अपनी दावेदारी ठोंकने में जरा भी देरी नहीं करना चाहते थे. इस तरह से अब जब हरियाणा से विधानसभा चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं तो ये कहने में जरा भी गुरेज नहीं कि इस चुनाव में कांग्रेस ने ही कांग्रेस को हराया और पार्टी के अंदर की लड़ाई ने उसे सत्ता से दूर कर दिया. तो वहीं पार्टी के तमाम दावों को खोखला साबित कर दिया है.

राहुल गांधी का भी नहीं चला जादू

तो दूसरी ओर इस पूरे चुनाव के दौरान कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी का भी जादू चलते हुए नहीं दिखाई दिया क्योंकि उन्होंने हरियाणा में 12 सीटों पर चुनावी रैलियां की थी लेकिन जिन सीटों पर उन्होंने प्रचार किया था उनमें से पार्टी को मात्र 5 सीट पर ही जीत मिली है. इनमें से गन्नौर, सोनीपत और बहादुरगढ़ में तो कांग्रेस को ऐसा झटका लगा कि यहां से निर्दलीय उम्मीदवार जीत गए और गन्नौर सीट पर तो कांग्रेस प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे. इससे ये बात साफ होती है कि पार्टी के अंदर जो कलह चल रही थी उसे राहुल गांधी का प्रचार भी खत्म नहीं कर सका. हालांकि राहुल गांधी ने मंच से कुमारी शैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा का हाथ मिलवाकर पार्टी के एकजुट होने का संदेश भी दिया था, लेकिन नतीजे बता रहे हैं कि राहुल गांधी का ये तरीका भी काम नहीं आया.

आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस को डाला परेशानी में

पार्टी के अंदर प्रदेश के शीर्ष नेताओं के बीच कलह ने पार्टी को और ज्यादा नुकसान तो पहुंचाया ही साथ ही कांग्रेस के खिलाफ मैदान में उतरी आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस को परेशानी में डाला.

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