Karwa Chauth-2022: इस बार चंद्रोदय से पहले ही कर लें करवाचौथ की पूजा, 24 मिनट के अंदर करें पारण, जानें क्या है शुभ मुहूर्त, इस संकल्प के साथ शुरू करें व्रत, देखें गणेश जी की कथा

October 9, 2022 by No Comments

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करवा चौथ स्पेशल। करवा चौथ का व्रत सुहागिनों के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय त्योहार है। वैसे तो प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी और चंद्रमा का व्रत किया जाता है, लेकिन कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को पड़ने वाली चतुर्थी को मनाए जाने वाले करवा चौथ ( Karwa Chauth) व्रत का महत्व अलग ही है। इस बार 13 अक्टूबर को करवाचौथ पड़ रहा है।

सुहागिनें करवा चौथ पर इस तरह करती हैं श्रंगार। (फाइल फोटो)

आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी बताते हैं कि इस बार करवा चौथ का पूजन चंद्रोदय के पहले करना उत्तम होगा। चंद्रोदय रात 8.07 बजे होगा। इससे पहले प्रदोष बेला में 7.30 बजे तक पूजन कर सकते हैं। आंगन में गाय के गोबर से लीपकर और स्वास्तिक बनाकर पूजन करना चाहिए। चंद्रोदय के एक घड़ी (24 मिनट) के भीतर ही चंद्र को अर्घ्य देकर और गौरी गणेश का पूजन कर चौथ माई के व्रत का पारण कर लेना उत्तम होगा। करवाचौथ के व्रत में शिव पार्वती, कार्तिकेय, श्रीगणेश और चंद्रमा का पूजन करना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है।

बता दें कि यह व्रत पति की दीर्घायु के लिए सनातन धर्म को मानने वाली सुहागिनों द्वारा रखा जाता है। इसीलिए महिलाएं चंद्र देव की पूजा करने के बाद भगवान से अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी आयु के लिए शाम को पूजा करने के बाद ही पति के हाथ से ही जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। बता दें कि अब यह त्योहार न केवल भारत, बल्कि विदेशों में भी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने लगा है।

इस संकल्प के साथ शुरू करें व्रत
इस बार यह निर्जला व्रत 13 अक्टूबर 2022 को पड़ रहा है। इस मौके पर सुहागिने निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु के लिए पूजा-पाठ करेंगी। आचार्य सुशील कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी को यह व्रत किया जाता है।

शास्त्रों के मुताबिक व्रत को रखने वाली महिलाओं को चाहिए कि वह सुबह स्नान करने के बाद आचमन करके पति, पुत्र, पौत्र तथा सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प लेकर यह व्रत करना चाहिए। इस व्रत में शिव, पार्वती, कार्तिकेय, गणेश तथा चंद्रमा का पूजन करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। चंद्र उदय होने के बाद चंद्रमा के दर्शन करके अर्घ्य देकर ही जल व भोजन ग्रहण करें। पूजा के बाद तांबे या मिट्टी के करवे में चावल, उड़द, रिबन व रुपया रखकर दान करना चाहिए। इसी के साथ सास के पांव छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। साथ ही सास को फल, मेवा, सुहाग की सामग्री आदि उपहार में देनी चाहिए।

गणेश जी की आरती

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

एक दंत दयावंत,
चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे,
मूसे की सवारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पान चढ़े फूल चढ़े,
और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे,
संत करें सेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

अंधन को आंख देत,
कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

‘सूर’ श्याम शरण आए,
सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

दीनन की लाज रखो,
शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो,
जाऊं बलिहारी ॥

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा ॥

पढ़ें गणेश जी की कथा

DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। किसी भी धार्मिक कार्य को करते वक्त मन को एकाग्र अवश्य रखें। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)