Lucknow News: ट्रैफिक दरोगा और दो सिपाहियों को जेसीपी ने घूस लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा, मांगे थे 10 हजार, देखें पूरा मामला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में खुलेआम ट्रैफिक पुलिस वाहन चेकिंग के नाम पर यातायात माह में वसूली करने में जुटी है। शनिवार दोपहर सुशांत गोल्फ सिटी शहीदपथ अंडर पास के नीचे ट्रैफिक बूथ में जेसीपी पीयूष मोर्डिया ने दो सिपाहियों और एक दारोगा को उस वक्त रंगेहाथ पकड़ लिया, जब वे ट्रेवलर चालक से 10 हजार की घूस मांग रहे थे। जेसीपी छापेमारी के दौरान सादे कपड़ों में बूथ पर पहुंचे थे। जेसीपी ने तीनों को सुशांत गोल्फ सिटी थाने की पुलिस के सिपुर्द कर दिया।
देखें पूरा मामला
मीडिया सूत्रों के मुताबिक शनिवार दोपहर जेसीपी पीयूष मोर्डिया मीटिंग के लिए पुलिस मुख्यालय जा रहे थे। वह सादे कपड़ों में थे, कि तभी उन्होंने देखा कि सुशांत गोल्फ सिटी शहीदपथ अंडर पास के नीचे बने ट्रैफिक बूथ के पास सड़क पर तेलंगाना नंबर की ट्रेवलर गाड़ी खड़ी है। इसकी वजह से सड़क पर जाम लगा हुआ था। यह देख जेसीपी ने अपनी गाड़ी किनारे करवा दी और पैदल ही वह बूथ में पहुंचे। तो अंदर ट्रैफिक सिपाही धर्मेंद्र और अंकुर, चालक से परमिट न होने का हवाला देकर 10 हजार रुपये मांग कर रहे थे। दोनों रुपयों के लिए चालक को हड़का भी रहे थे। पास ही टीएसआइ राजू भास्कर खड़े थे।
ट्रैफिक पुलिस के घूस मांगने पर चालक चार हजार रुपये देने को तैयार हो गया था। सब इस बात से बेखबर होकर वसूली में व्यस्त थे, कि पास ही जेसीपी खड़े होकर सब कुछ देख रहे हैं। कि तभी अचानक जेसीपी पर सिपाही अंकुर की नजर पड़ी तो वह भाग खड़ा हुआ। इसके बाद जेसीपी ने सिपाही धर्मेंद्र और टीएसआइ राजू को पकड़ा और चालक से पूरे मामले की पूछताछ की। इस पर चालक ने बताया कि वह तेलंगाना का रहने वाला अजय साम्बले है। वह घूमने के लिए वाराणसी गया था। उसके बाद लखनऊ होते हुए नैमिषारण जा रहा था। इसी बीच सिपाहियों ने उसे रोका और परमिट मांगा। ऑनलाइन परमिट देखा तो यहां का नहीं था। इसके बाद हड़काने लगे और 10 हजार रुपयों की मांग करने लगे।
इस पर वह चार हजार रुपये देने के लिए तैयार हो गया था। जेसीपी ने तत्काल इंस्पेक्टर सुशांत गोल्फ सिटी शैलेंद्र गिरी को मामले की जानकारी दी। शैलेंद्र गिरी मौके पर पहुंचे और दरोगा व सिपाही को थाने लेकर चले गए। इसके बाद सिपाही अंकुर को भी पकड़ लिया गया। जेसीपी ने बताया कि तीनों चालक से रुपये मांग रहे थे। इस कारण उनके निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच एडीसीपी ट्रैफिक को सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य आएंगे उसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर बर्खास्तगी की भी कार्रवाई की जाएगी।