Buddhist Philosophy: जानें क्या है चित्त…बौद्ध दर्शन के पाली साहित्य में इसे किस प्रकार से किया गया है व्यक्त?
Buddhist Philosophy: लखनऊ विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के द्वारा शनिवार को सेमिनार की श्रृंखला में अंतराराष्ट्रीय शोध छात्र नानीसारा (म्यांमार ) ने विभागाध्यक्षा डॉ० रजनी श्रीवास्तव के संरक्षण में एक व्याख्यान का प्रस्तुत किया। उनके द्वारा प्रस्तुत व्याख्यान का विषय “Examining the concept of mind(Citta): in Theravada Buddhist philosophy” था।
उन्होंने अपने व्याख्यान के माध्यम से बौद्ध दर्शन की थेरवाद शाखा में व्यक्त चित्त की अवधारणा का वर्णन किया। उनके द्वारा व्यक्त की गई इस चित्त की अवधारणा का उद्देश्य इस बात को स्थापित करना था कि कैसे यह दर्शन, मन, चेतना को समझने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को निभाता है। उन्होंने ने अपने व्याख्यान का प्रारंभ चित्त को परिभाषित करते हुए किया और इस बात पर भी प्रकाश डाला कि बौद्ध दर्शन के पाली साहित्य में किस प्रकार से इसे व्यक्त किया गया है। चित्त की अवधारणा को पाली साहित्य में मानसिक अवधारणा की केंद्रीय भूमिका के रूप में स्वीकार किया गया है।
इस व्याख्यान के माध्यम से यह भी व्यक्त किया कि कैसे हमारा चित्त बाहरी अनुभावों से अपना संबंध स्थापित करता है। माइंडफूलनेस अभ्यास और ध्यान में चित्त के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को भी व्यक्त करने का प्रायस किया। उनके व्याख्यान के बाद विभाग की प्राचार्य डॉक्टर रजनी श्रीवास्तव ने उनके व्याख्यान को संक्षिप्त करते हुए अपनी टिप्पणियों को व्यक्त किया। सेमिनार में दर्शनशास्त्र विभाग के प्राचार्य डॉ. राजेंद्र वर्मा एवं विभागाध्यक्षा डॉ. रजनी श्रीवास्तव के साथ विभाग और विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के शोध छात्र उपस्थिति रहे। सेमिनार की कोऑर्डिनेटर विभाग की शोध छात्रा निशी कुमारी रही।