Lucknow University: पूर्व छात्रों को जोड़ने के लिए इस स्टूडेंट ने किया गेम चेंजर कार्य…Google Startup ने की ये पेशकश

September 22, 2025 by No Comments

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Lucknow University: लखनऊ विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में बीटेक (CSE) तृतीय वर्ष के छात्र घनश्याम ने Alumconn (alumconn.in) नामक एक निःशुल्क SaaS प्लेटफॉर्म विकसित कर पूर्व छात्रों को एक मंच पर लाने का सराहनीय कार्य किया है. इससे किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को पूर्व छात्रों के अनुभव प्राप्त हो सकेंगे और उनके सीधा सम्पर्क भी हो सकेगा. इस प्लेटफार्म को छात्र समुदाय के पारिस्थितिकी तंत्र में गेम-चेंजर माना जा रहा है।

आज के दौर में जब अधिकांश स्टार्ट-अप्स फंडिंग और ग्रांट्स का इंतज़ार करते हैं तो वहीं घनश्याम ने मजबूत विचार, दृढ़ संकल्प और स्मार्ट कार्यान्वयन से बिना किसी वित्तीय सहयोग के एक सफल प्लेटफॉर्म बना कर जहां चाह वहां राह वाली कहावत को साबित कर दिय.

कैसे आया इसका विचार? 

घनश्याम बताते हैं कि Alumconn का विचार उनके मन में प्रथम वर्ष में ही आ गया था. जब उन्होंने देखा कि जूनियर्स, सीनियर्स और एलुमनाई के बीच एक बड़ा अंतराल है और नए छात्रों को अक्सर सही मार्गदर्शन, प्रामाणिक जानकारी और प्रत्यक्ष कनेक्शन नहीं मिल पाते हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए उन्होंने द्वितीय वर्ष में एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना शुरू किया, जहाँ हर कॉलेज का अपना वेरिफ़ाइड समुदाय हो। इस पर छात्र पोस्ट कर सकते हैं, समूह बना सकते हैं, कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं और यहाँ तक कि Drivona नामक एआई-संचालित स्टडी असिस्टेंट का भी उपयोग कर सकते हैं।

घनश्याम आगे बताते हैं कि Alumconn खुद को छात्रों के लिए LinkedIn, WhatsApp और इवेंट मैनेजमेंट टूल्स का सीधा विकल्प बना रहा है। LinkedIn की तुलना में जहाँ सहपाठियों को ढूँढना कठिन होता है, वहीं Alumconn बैचमेट्स और एलुमनाई को सीधे जोड़ता है।

WhatsApp की तुलना में, जहाँ मोबाइल नंबर साझा करने से प्राइवेसी की समस्या होती हैविशेषकर छात्राओं के लिएAlumconn पर केवल नाम और शाखा दिखाई देती है, जिससे सुरक्षित समूह संवाद संभव हो पाता है। इसी तरह, कॉलेज सीधे Alumconn पर अपने कार्यक्रम पोस्ट कर सकते हैं, जिससे सभी छात्रों को तुरंत सूचना और RSVP विकल्प मिल जाता है।

नहीं आसान थी राह

घनश्याम बताते हैं कि इस प्लेटफॉर्म को बनाने की राह आसान नहीं थी। इसके लिए महंगे सर्वर और प्रीमियम टूल्स लेना एक छात्र होने के नाते नहीं ले सकते थे। इसलिए गहन रिसर्च किया और सीनियर्स से मार्गदर्शन लिया और निःशुल्क सेवाओं का सहारा लिया। शुरुआत में इससे वेबसाइट धीमी चलती थी, लेकिन अपनी उत्कृष्ट कोडिंग क्षमता से उन्होंने प्रदर्शन को बेहतर बनाया और प्लेटफॉर्म को सुचारु रूप से चलाया।

मार्केटिंग थी सबसे बड़ी चुनौती

घनश्याम कहते हैं कि इसके लिए सबसे बड़ी चुनौती तकनीकी नहीं बल्कि मार्केटिंग थी। बड़े नेटवर्क और संसाधनों के अभाव में घनश्याम ने Alumconn को अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स और कॉलेज समूहों के माध्यम से प्रचारित किया। कुछ ही दिनों में लगभग 100 उपयोगकर्ता जुड़ गए। संख्या भले ही कम दिखे, लेकिन बिना किसी संसाधन और सहयोग के यह दूसरे वर्ष के छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि थी।

मिली क्लाउड क्रेडिट की पेशकश

इस तरह से जल्द ही उनके कार्य को पहचान मिल गई। सबसे बड़ी बात हुई जून 2025 में जब Google Startup ने उन्हें लगभग $350,000 मूल्य तक के क्लाउड क्रेडिट की पेशकश की। इसके बावजूद घनश्याम ने महंगी सेवाओं पर निर्भर न होने का निर्णय लिया ताकि भविष्य में छात्रों से शुल्क न लेना पड़े। उनकी दृष्टि स्पष्ट हैAlumconn सभी छात्रों के लिए हमेशा निःशुल्क और सुलभ रहे।

तैयार किया एक टिकाऊ बिजनेस मॉडल

दीर्घकालिक विकास के लिए उन्होंने एक टिकाऊ बिज़नेस मॉडल भी तैयार किया है। जबकि मुख्य प्लेटफॉर्म हमेशा निःशुल्क रहेगा, प्रीमियम उपयोगकर्ताओं को विशेष लाभ मिलेंगेजैसे उन्नत फीचर्स, एडवांस्ड एक्सेस और मूल्यवान पोस्ट साझा करने पर रिवार्ड्स। यह न केवल वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा बल्कि छात्रों को सार्थक योगदान करने पर पुरस्कृत होने का अवसर भी देगा।

घनश्याम कहते हैं कि “मेरा लक्ष्य है कि Alumconn हर छात्र का गो-टू प्लेटफॉर्म बने, जहाँ लागत और प्राइवेसी की बाधाएँ न हों.”

शिक्षा विशेषज्ञों की राय

बता दें कि आज विभिन्न कॉलेजों के छात्र पहले से ही Alumconn का उपयोग कर रहे हैं. तो वहीं इसको लेकर शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया गया तो यह प्लेटफॉर्म भविष्य में यूनिकॉर्न बन सकता है। यह प्लेटफॉर्म लाइव है और आप इसे यहाँ देख सकते हैं – (https://alumconn.in)

कुलपति ने की सराहना

लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मनुका खन्ना, अभियांत्रिकी एवं तकनीकी संकाय के डीन प्रो. ए.के. सिंह ने इस पहल की सराहना की। वहीं कंप्यूटर साइंस विभाग के समन्वयक डॉ. ज़ीशान अली सिद्दीकी ने घनश्याम को तकनीकी पहलुओं से परे, विचारों को आकार देने और छात्रों की ज़रूरतों को समझने में मार्गदर्शन दिया।

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