पति को नीले ड्रम में भरने वाली पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल दोषी करार…जानें कौन हैं सजा सुनाने वाले जज अरविंद कुमार मिश्रा?
Meerut Blue Drum Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ का चर्चित नीला ड्रम कांड आज एक बार फिर से चर्चा में है. मृतक सौरभ राजपूत हत्याकांड मामले में जज ने मर्डर करने वाली पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को दोषी करार दिया है. करीब 13 महीने चले ट्रायल में 126 पेशियां और 22 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इस मामले में 30 सितंबर 2026 यानी आज मेरठ के जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने फैसला सुना दिया है और महीनों के इंतजार को खत्म कर दिया है.
तो वहीं जज ने भरे कोर्ट में जब मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला से सवाल किया कि सजा कम क्यों दी जाए तो दोनों ने सजा कम किए जाने पर अपना पक्ष रखने से साफ इनकार कर दिया. इसके बाद सभी चौंक गए. दोनों की पेशी ऑनलाइन माध्यम से हुई तो वहीं मृतक सौरभ राजपूत के परिजन कोर्ट में मौजूद रहे और आरोपियों को फांसी देने की मांग करते रहे. फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों को सजा की अवधि पर बहस के लिए 15 दिन का वक्त दिया है. अंतिम फैसला 14 अक्टूबर 2026 को सुनाया जाएगा।
जानें कौन हैं चर्चित हत्याकांड में फैसला सुनाने वाले जज?
जज अरविंद कुमार मिश्रा-II का जन्म 2 जुलाई 1971 को हुआ था. उनका गृह जिला मऊ ऊत्तर प्रदेश है तो वहीं पिता का नाम स्वर्गीय बीपी मिश्रा है.
वर्ष 1990 में बीए की पढ़ाई सेकंड डिवीजन के साथ पूरी की थी और 1994 में फर्स्ट डिवीजन के साथ एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. वर्ष 1996 में सेकंड डिवीजन से एलएलएम पूरा करने के बाद 31 मई 2003 को वह न्यायिक सेवा में अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के तौर पर नियुक्त हुए. उनकी पहली तैनाती गाजीपुर में हुई.
फिर इसके बाद पोस्टिंग के दौरान अलग-अलग जगह मिलती रही. गाजीपुर के साथ ही वह सैदपुर-गाजीपुर, मुसाफिरखाना-सुल्तानपुर और फिर अलीगढ़ में रहे. अलीगढ़ में जज अरविंद मिश्रा ने अपर सिविल जज, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज सीनियर डिवीजन के साथ ही रेलवे एसीजेएम जैसी बड़ी जिम्मेदारियों को सम्भाला. 2011 में वह गोरखपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) बने. इस तरह से न्यायिक करियर में वरिष्ठ जिम्मेदारियों वाला सिलसिला आगे बढ़ता रहा.
कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी सम्भाली
साल 2013 में उनको अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गोरखपुर की जिम्मेदारी मिली. फिर कानपुर पोस्टिंग हुई. यहां पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश और बाद में अपर प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट के तौर पर भी काम किया. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में भी प्रतिनियुक्ति पर काम किया.
साल 2018 से 2020 के बीच लखनऊ में विशेष सचिव एवं अपर विधि परामर्शदाता (Legislative) भी रहे. हाईकोर्ट की प्रोफाइल में इस अवधि को उनके करियर में Deputation के तौर पर दर्ज किया गया है.
फैमिली कोर्ट से लेकर स्टेट ट्रांसपोर्ट ट्रिब्यूनल तक का सफर तय किया
सरकारी प्रतिनियुक्ति के बाद उनको बस्ती के प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट की जिम्मेदारी मिली. कानपुर नगर के प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट की जिम्मेदारी संभाली. साल 2023 में उन्हें स्टेट ट्रांसपोर्ट अपीलेट ट्रिब्यूनल, लखनऊ का चेयरमैन बनाया गया. यह पद भी उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर संभाला था.
2024 में मिली जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी
इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रोफाइल से मिली जानकारी के मुताबिक, 14 नवंबर 2024 से 19 मई 2026 तक अरविंद मिश्रा जिला एवं सत्र न्यायाधीश मिर्जापुर रहे. फिर 21 मई 2026 से जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मेरठ के पद पर तैनात रहे. मतलब मेरठ में नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड की सुनवाई जिस अदालत में हुई है, उसकी अध्यक्षता वर्तमान समय में जज अरविंद कुमार मिश्रा-II ही कर रहे हैं.