विधायक को मिली 3 साल की सजा…25 साल पुराने केस में बड़ा फैसला; जानें क्या है मामला?
Rajendra Bharti Case: दतिया के विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने बैंक घोटाले के मामले में दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट (दिल्ली की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट) ने आज 3 साल की सजा सुनाई है. बुधवार को कोर्ट ने उनको दोषी ठहराया था और फिर गुरुवार यानी आज सजा की घोषणा की है.
इसी मामले में बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को भी 3 साल की सजा सुनाई गई है. फिलहाल दोनों को कोर्ट ने जमानत देते हुए अपील के लिए 30 दिन का समय दिया है. बता दें कि 1998 में एफडी पर नियमों के खिलाफ ब्याज निकालने से ये केस जुड़ा है.
बता दें कि राजेंद्र भारती मध्य प्रदेश की दतिया सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं. हालांकि गुरुवार को कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाने के साथ ही अंतरिम जमानत भी दे दी है लेकिन इस फैसले के बाद से माना जा रहा है कि उनकी विधायकी पर तलवार लटक रही है. फिलहाल उनके सह-आरोपी पूर्व बैंक लिपिक रघुवीर प्रजापति को भी तीन साल की सजा सुनाई गई है.
जानें क्या था आरोप?
बता दें कि राजेंद्र भारती वर्ष 1998 में जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (भूमि विकास बैंक) के अध्यक्ष थे. तब उन्होंने अपनी मां सावित्री श्याम के नाम से 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी. यह एफडी मूल रूप से तीन साल की अवधि के लिए थी और इसका 13.5% ब्याज दर था.
इसको लेकर भारती पर आरोप लगा कि उन्होंने बैंक कर्मचारी के साथ मिलकर कागजातों में हेराफेरी की और फिर एफडी की अवधि को बढ़ाकर पहले 10 साल किया और फिर 15 साल कर दी. यही नहीं बाजार में जब ब्याज दरें घट गई तब भी वह पूरे समय तक 13.5% ब्याज ही निकालते रहे. इस वजह से बैंक को नुकसान हुआ. तो वहीं यह फर्जीवाड़ा लंबे समय तक चलता रहा.
ऐसे हुआ मामले का खुलासा ?
भाजपा नेता पप्पू पुजारी जब साल 2011 में बैंक के अध्यक्ष बने तो उन्होंने इस अनियमितता को पकड़ा. फिर सहकारिता विभाग की जांच में एफडी पर ऑडिट आपत्ति दर्ज कराई गई. इसके बाद जब राजेंद्र भारती ने एफडी की राशि की मांग की तो बैंक ने इसका भुगतान करने से मना कर दिया. इस पर भारती उपभोक्ता फोरम, राज्य फोरम, राष्ट्रीय फोरम और अंत में सुप्रीम कोर्ट तक चले गए लेकिन उनको कोई राहत नहीं मिली.
2015 में दर्ज हुआ मामला
इसके बाद 2015 में तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे ने पहल की और आपराधिक मामला भारती के खिलाफ दर्ज हुआ. आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जालसाजी से संबंधित) के तहत मामला दर्ज किया गया. इसके बाद ये केस ग्वालियर से दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित हो गया.
क्या अब जाएगी विधायकी?
बता दें कि कोर्ट ने भारती को विभिन्न धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई है. तीन-तीन साल की सजा दो धाराओं में और एक में दो साल की सजा सुनाई है. इस तरह से कुल मिलाकर तीन साल की सजा प्रभावी मानी जा रही है. अगर कानूनी प्रावधान देखे जाएं तो दो साल या उससे अधिक सजा होने पर विधायक की सदस्यता जा सकती है. फिलहाल विधायक के बेटे अनुज भारती का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी.
इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं की अगर माने तो उनको अपील दायर करने के लिए 60 दिन का वक्त मिलेगा. अगर हाईकोर्ट सजा पर स्थगन (स्टे) दे देता है तो विधायकी बच सकती है लेकिन सदस्यता पर फिलहाल संकट मंडरा रहा है.
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