मास शिवरात्रि पर करें इस तरह भोले बाबा की पूजा, ये 17 मंत्र दिलायेंगे कर्जे से मुक्ति, देखें पूरी जानकारी
अगर आप सालों के कर्जे से परेशान हैं और तमाम कोशिशों के बाद भी आपका कर्जा नहीं उतर रहा है तो भोले बाबा के 17 मंत्र करने से आपको इसमें लाभ जरूर मिलेगा। एक बार इसे पूरे मन और श्रद्धा से करके देखें। बाबा दौलत गिरि संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य विनोद कुमार मिश्र बताते हैं कि सावन महीने की मास शिवरात्रि (6 अगस्त को पड़ रही है) का खासा महत्व होता है। अगर पूरी लगन से इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाए और 17 मंत्रों का जाप किया जाए तो सालों के कर्जे से आपको मुक्ति मिल जाएगी। अर्थात कर्जा चुकाने में जो भी बाधा आ रही है, उसका नाश होगा और आप अपने कार्य में सफल होंगे। इस उपाय को हर महीने की पड़ने वाली मास शिवरात्रि पर भी किया जा सकता है।
मास शिवरात्रि पर ये काम करें
हालांकि प्रत्येक मास की शिवरात्रि भी फलदायी होती है लेकिन सावन मास की शिवरात्रि का अलग महत्व इसलिए हो जाता है क्योकि इस महीने को शिव जी का महीना माना गया है। प्रत्येक मास शिवरात्रि को सूर्यास्त के समय घर में बैठकर शिवजी का स्मरण करते- करते नीचे दिए 17 मंत्र बोलें, जिन पर कर्जा ज्यादा हो,वो शिवजी के मंदिर में दीपक जलाकर ये 17 मंत्र बोले। इससे कर्जा से मुक्ति मिलेगी।
इस तरह पाएं आर्थिक समस्या से निदान
जो लोग सालों से आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं उनको मास शिवरात्रि के दिन संध्या के समय जप-प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही शिवजी के मंदिर में दीप-दान करना चाहिए। रात को 12 बजे थोड़ी देर जग कर जप और एक श्री हनुमान चालीसा का पाठ करें। लगातार ऐसा करने से आर्थिक समस्या दूर होगी। बता दें कि साल भर में एक महाशिवरात्रि होती है और हर महीने में एक मास शिवरात्रि पड़ती है। इस दिन शाम को सूर्यास्त के समय एक दीपक में पाँच अलग-अलग लंबी बत्तियों को एक में कर के शिवलिंग के आगे जलाना चाहिए। इसके बाद भगवान शिवजी के नाम का जप कर, प्रार्थना करे करनी चाहिए। इससे व्यक्ति का कर्ज तो उतरता ही है साथ ही आर्थिक समस्या भी दूर होती है ।
ये हैं 17 मंत्र
ॐ शिवाय नम:
ॐ सर्वात्मने नम:
ॐ त्रिनेत्राय नम:
ॐ हराय नम:
ॐ इन्द्र्मुखाय नम:
ॐ श्रीकंठाय नम:
ॐ सद्योजाताय नम:
ॐ वामदेवाय नम:
ॐ अघोरह्र्द्याय नम:
ॐ तत्पुरुषाय नम:
ॐ ईशानाय नम:
ॐ अनंतधर्माय नम:
ॐ ज्ञानभूताय नम:
ॐ अनंतवैराग्यसिंघाय नम:
ॐ प्रधानाय नम:
ॐ व्योमात्मने नम:
ॐ युक्तकेशात्मरूपाय नम:
DISCLAIMER:यह लेख धार्मिक मान्यताओं व धर्म शास्त्रों पर आधारित है। हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते। पाठक धर्म से जुड़े किसी भी कार्य को करने से पहले अपने पुरोहित या आचार्य से अवश्य परामर्श ले लें। KhabarSting इसकी पुष्टि नहीं करता।)