बाल कन्हैया और मां यशोदा की इस पेंटिंग ने रचा नया इतिहास…बिकी इतने करोड़ में कि चौंक गए बड़े-बड़े कलाकार

April 5, 2026 by No Comments

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Raja Ravi Varma Painting: सोशल मीडिया पर एक पेंटिंग तेजी से वायरल हो रही है. इस पेंटिंग में लाडले कन्हैया के बाल स्वरूप की फोटो है. वह इस फोटो में बिना कपड़ों के हैं और मां यशोदा से चिपके हुए हैं तो वहीं मां यशोदा गाय का दूध निकाल रही हैं. इस खूबसूरत पेंटिंग ने एक नया इतिहास रच दिया है. दरअसल सुंदर पेंटिंग सेफ्रॉन आर्ट की नीलामी में 167 करोड़ रुपये में बिकी है जिसे भारतीय इतिहास में अब तक की सबसे महंगी पेंटिंग बताया जा रहा है.

यह पेंटिंग राजा रवि वर्मा द्वारा बनाई गई है और इसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और एमडी साइरस एस पूनावाला ने खरीदा है. इस पेंटिंग की कीमत ने मशहूर चित्रकार एमएफ हुसैन की तस्वीरों का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है जो पिछले साल 118 करोड़ रुपये में नीलाम हुई थी.

कब बनाई थी ये पेंटिंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा ने 1890 के दशक में अपने करियर के चरम पर इस पेंटिंग को बनाया था. ये हमेशा से सुर्खियों में रही है. मुंबई में नीलामी घर सैफ्रॉन आर्ट की नीलामी में ये पेंटिंग 17,9 करोड़ डॉलर में बिकी और इसी के साथ ही इस पेंटिंग के सिर भारतीय कला जगत की अब तक की सबसे महंगी पेंटिंग का ताज सज गया.

फिलहाल तो इस पेंटिंग की बिक्री से पहले के 80-120 करोड़ रुपये की बोली लगने का अनुमान था, लेकिन इसने उम्मीद से दोगुना ज्यादा कीमत वसूल कर ली और एक नया इतिहास रच दिया. बता दें कि साइरस पूनावाला कोरोना के वक्त कोविशील्ड वैक्सीन के सह उत्पादन को लेकर काफी चर्चा बटोरी थी.

ये मेरा सौभाग्य है

सोशल मीडिया पर सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष साइरस पूनावाला का बयान वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने कहा कि इस पेंटिंग को खरीदना उनका सौभाग्य है.

जनता के दर्शन के लिए रहेगी उपलब्ध

साइरस ने अपने बयान में ये भी बताया है कि ये पेंटिंग राष्ट्रीय धरोहर है और ये जनता के दर्शन के लिए हमेशा उपलब्ध रहेगी.

परदादा को मिला सम्मान

त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार की पूयम थिरुनाल गौरी पार्वती ने पेंटिंग के खरीदा जाने को लेकर खुशी व्यक्त की है और इसे अपने परदादा का सम्मान बताया और कहा कि इसके वह हकदार हैं.

उड़ाया जाता था मजाक

गौरी पार्वती ने ये भी बताया कि 20 वीं शताब्दी का एक दौर ऐसा भी था जब उनके परदादा का पोस्टर चित्रकार कहकर उपहास उड़ाया जाता था, लेकिन अब उनकी विरासत और कौशल को सम्मान मिलता है. उन्होंने ये भी कहा कि उनके परदादा ने खरीदारों व आलोचकों को प्रसन्न करने के लिए चित्रकारी नहीं की. साड़ी को लोकप्रिय बनाने और उत्तम आभूषणों को संरक्षित करने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

केरल में जन्मे

भारत में मशहूर कलाकारों में से एक माने जाने वाले रवि वर्मा का जन्म 1848 में केरल के किलिमानूर में हुआ था. वह तेल चित्रों के माध्यम से भारतीय पौराणिक विषयों को जीवंत रूप देने के लिए जाने जाते रहे. माता सीता, शकुंतला, द्रौपदी से लेकर दमयंती जैसी पौराणिक महिला पात्रों पर उनकी पेंटिंग आज के कलाकारों को न केवल आकर्षित बल्कि प्रेरित करती हैं.

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