Sukhoi Su-30 MKI Crashes: शहीद अनुज की अंतिम विदाई में फूट-फूट कर रोई मंगेतर… जल्द होने वाली थी शादी-Video

March 9, 2026 by No Comments

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Sukhoi Su-30 MKI Crashes: बीते गुरुवार को असम के कार्बी आंगलॉन्ग जिले में सुखोई-30एमकेआई (SU-30MKI) फाइटर जेट क्रैश होने की वजह से भारत भारतीय वायुसेना के दो जांबाज़ पायलट स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर को खो दिया था.

दोनों अधिकारी प्रशिक्षण उड़ान पर थे लेकिन उनका विमान अचानक रडार से गायब हो गया था और फिर खोजबीन के दौरान विमान का मलबा कार्बी आंगलोंग के पहाड़ी इलाके में मिला. भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को हादसे की पुष्टि की थी. इसी के बाद से शहीदों के घरों में ही नहीं पूरे देश में मातम पसर गया था.

तो वहीं सोशल मीडिया पर शहीद अनुज से अंतिम संस्कार का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें शहीद अनुज की मंगेतर, जो खुद भी सेना की वर्दी पहने हैं, अपने आंसू रोक नहीं पा रही हैं. उनके साथ उनके परिजन उन्हें सांत्वना दे रहे हैं लेकिन उनके आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. बताया जा रहा है कि दोनों की जल्द ही शादी होने वाली थी.

अनुज हरियाणा के रोहतक जिले के ककराना गांव के रहने वाले थे. उनके पिता आनंद भारतीय थल सेना से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हैं तो वहीं अनुज अपने पिता से प्रेरित होकर ही सेना में शामिल हुए थे और देश सेवा कर रहे थे लेकिन इस दुखद हादसे में वह शहीद हो गए. शहीद अनुज का परिवार अब गुरुग्राम के सेक्टर-22B में रहता है.

अनुज 29 साल के थे और उनकी शादी जल्द ही होने वाली थी. घर में शादी की तैयारी भी चल रही थी. सोशल मीडिया पर शहीद अनुज से जुड़ी जानकारियां वायरल हो रही हैं. वह लगभग एक दशक पहले वायुसेना से जुड़े थे और बचपन से ही विमान उड़ाने का सपना देखते थे. वह शांत स्वभाव के थे और थोड़े अंतर्मुखी थे, लेकिन उड़ान के प्रति उनका जुनून बेहद मजबूत था.

ऑपरेशन सिंदूर में पुर्वेश ने दिखाई थी बहादुरी

बता दें कि इस हादसे में 25 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुर्वेश दुरागकर भी शहीद हुए हैं. वह महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले थे और करीब चार साल पहले भारतीय वायुसेना में नियुक्ति हासिल की थी. वह हाल ही में अपने परिवार से मिलने के लिए गए थे और फिर लौट आए थे. खबरों के मुताबिक, पिछले साल मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ जो ऐतिहासिक ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था उसमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुर्वेश दुरागकर ने भी अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था.

सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर धज्जियां उड़ा दी थी. फिलहाल तो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों के कारण वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर इस ऑपरेशन में उनकी भूमिका की पुष्टि नहीं की है लेकिन उनके साथियों का दावा है कि वह बेहद प्रतिभाशाली और साहसी पायलट थे और कम समय में उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता रविंद्र दुरागकर को हादसे की जानकारी पहले तो किसी रिश्तेदार के माध्यम से मिली लेकिन फिर वायुसेना के अधिकारियों ने फोन पर बेटे के शहीद होने की पुष्टि की. परिवार का कहना है कि बेटे के शहीद होने पर परिवार को गर्व है.

पहले भी हादसों का शिकार हुआ सुखोई

मालूम हो कि साल 2002 में सुखोई-30एमकेआई विमान को भारतीय वायुसेना के बेड़े में सम्मिलित किया गया था. इसके बाद से लेकर अब तक करीब 13 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. इसमें से चार हादसे पूर्वोत्तर क्षेत्र में हुए हैं. यानी इससे पहले हादसा 2017 में हुआ था. असम-अरुणाचल सीमा के पास सुखोई-30एमकेआई दुर्घटनाग्रस्त हुआ था और इस हादसे में भी दो पायलटों की मौत हो गई थी.

तो वहीं सुखोई-30एमकेआई विमान गुरुवार की शाम करीब 6:45 बजे जोरहाट एयरबेस से उड़ा था. लेकिन करीब एक घंटे बाद, 7:42 बजे विमान का संपर्क ग्राउंड कंट्रोल से टूट गया. फिर कुछ समय बाद कार्बी आंगलोंग के निलीप ब्लॉक के पास स्थानीय लोगों ने तेज धमाके की आवाज सुनी और आसमान में आग की लपटें देखीं गईं.

इस सम्बंध में प्रशासन ने बताया था कि विमान एक सुनसान पहाड़ी इलाके में गिरा था जहां पहुंचने के लिए सड़क से कम से कम तीन घंटे तक पैदल चलना पड़ता है. कहा जा रहा है कि विमान में तकनीकी दिक्कत आती देखकर दोनों पायलट सुखोई 30 MKI को आबादी से बेहद दूर ले गए, ताकि क्रैश में आम जनता का कोई नुकसान न हो.

मालूम हो कि जोरहाट एयरबेस द्वितीय विश्व युद्ध के समय का पुराना एयरबेस माना जाता है.

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