परिवार को छोड़कर कभी भी भागना नहीं चाहिए.
प्रेमानंद महाराज ने इस विवाद को लेकर कहा कि जब हमको विरोध सुनने को मिला तो, मेरा कार्य है कि सभी को सुख देना.