तब वीरता ही मानवता की सच्ची पहचान बनती है।
चार साहिबजादे शब्द का प्रयोग सिखों के दशम गुरु श्री गोविंद सिंह जी के चार सुपुत्रों साहबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह व फतेह सिंह को सामूहिक रूप से संबोधित करने हेतु किया जाता है।
तब वीरता ही मानवता की सच्ची पहचान बनती है।
चार साहिबजादे शब्द का प्रयोग सिखों के दशम गुरु श्री गोविंद सिंह जी के चार सुपुत्रों साहबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह व फतेह सिंह को सामूहिक रूप से संबोधित करने हेतु किया जाता है।