यह कार्यक्रम गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षा के मानवीय मूल्यों और प्रतिभा सम्मान की भावना का एक सुंदर उदाहरण बनकर सभी के मन में विशेष छाप छोड़ गया।

औषधीय प्रयोजनों के लिए भी किया जाता था और पेट दर्द, जलन, सिरदर्द और खुले घावों जैसी बीमारियों के इलाज के लिए इसे त्वचा पर लगाया जाता था।

विद्यालय की छात्रा अनामिका ने योग के महत्त्व के विषय में अपना विचार रखा कि आज की भागदौड़ की ज़िंदगी में योग से जुड़ने के मायने क्या हैं।

सीपीएआई इसके साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है जिसमें सिलाई केंद्रों के माध्यम से भी महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का प्रयास शामिल है।

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