Terrorists In India: वाराणसी में PFI के दो सदस्य गिरफ्तार, ज्ञानवापी मामले में थी दंगा भड़काने की साजिश, NIA और ATS जुटी जांच में, वहीं महाराष्ट्र में PFI ने प्रधानमंत्री को दी खुली चुनौती, लगाए “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे, वायरल हुआ वीडियो
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती देते हुए लोग “पाकिस्तान जिंदाबाद” के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। ये वीडियो महाराष्ट्र के पुणे जिले का बताया जा रहा है, जिसमें PFI के कार्यकर्ता नारे लगा रहे हैं। वहीं शनिवार सुबह ही वाराणसी से पीएफआई के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। बताया जा रहा है कि ये लोग ज्ञानवापी मामले में दंगा भड़काने की साजिश कर रहे थे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर NIA और ATS की टीम जांच में जुट गई है।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के पुणे में ज़िला कलेक्टर कार्यालय के बाहर कल ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे सुने गए थे। PFI (Popular Front of India) के कार्यकर्ता वहां ED-CBI-पुलिस की छापेमारी के ख़िलाफ़ इकट्ठे हुए थे। कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था जिन्हें आज सुबह गिरफ़्तार कर लिया गया है। वहीं इस मामले में डीसीपी जोन-2, पुणे, सागर पाटिल ने एएनआई को दिए बयान में कहा कि हमारे पास कुछ वीडियो आए हैं, हम उसकी पूरी जांच करेंगे। सत्यापन करेंगे और कार्रवाई करेंगे।
वहीं शनिवार सुबह वाराणसी में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दो सदस्यों को एनआईए और एटीएस की टीम ने शनिवार सुबह वाराणसी के कज्जाकपुरा रेलवे क्रॉसिंग के पास से गिरफ्तार किया। मीडिया सूत्रों के मुताबिक दोनों पर ज्ञानवापी प्रकरण में दंगे भड़काने की साजिश और फंड जुटाने, देश विरोधी कृत्य समेत अन्य कई आरोप हैं। एनआईए और एटीएस की टीम ने घंटे भर से अधिक समय तक दोनों से पूछताछ की।
देर शाम रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट में आरोपियों को पेश किया गया, जहां से 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। दोनों को सात दिन की कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए कमिश्नरेट पुलिस ने कोर्ट में आवेदन किया है। एटीएस के अनुसार गिरफ्तार जैतपुरा थाना अंतर्गत कच्चीबाग निवासी रिजवान अहमद और आदमपुर के आलमबाग निवासी मोहम्मद शाहिद है। दोनों के कब्जे से दस्तावेजी दो किताबें और अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस बरामद हुआ है। अभी तक की जांच में यह सामने आया है कि दोनों आरोपी साड़ी बनाने के कारोबार से जुड़े हैं।
बता दें कि 22 सितम्बर को ही लखनऊ के इंदिरानगर से भी एटीएस और एएनआई की टीम ने दो संदिग्ध आतंकवादियों को दबोचे थे। मीडिया सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने बताया कि अदालत में पुलिस व सरकार का पक्ष सहायक अभियोजन अधिकारी वंदना पाठक ने रखा। पूरे समय पुलिस टीम त्रिलोचन त्रिपाठी के नेतृत्व में मुस्तैद रही। दोनों आरोपियों के चेहरे काले कपड़े से ढंके थे। मामले की सुनवाई 26 सितंबर को होगी। पुलिस कस्टडी रिमांड का आवेदन विवेचक सहायक पुलिस अधीक्षक त्रिलोचन त्रिपाठी ने दिया है प्राथिमिकी एसटीएफ के भारतभूषण तिवारी ने दर्ज कराया था।
खास समुदाय की भावनाओं को भड़काने की कर रहे हैं साजिश
इस मामले को लेकर पुलिस का कहना है कि आरोपी इस्लामिक स्टेट के लिए संगठन बनाकर साजिश रच रहे हैं। ज्ञानवापी मामले पर खास समुदाय की भावनाओं को भड़का कर फंड इकट्ठा कर रहे थे। देश और समाज में अस्थिरता फैलाने के मंसूबे पर काम कर रहे थे। पुलिस ने आरोपियों की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस का कहना है कि उन्हें आरोपियों के घर की तलाशी लेनी है। उनके सहयोगियों के बारे में पूछताछ करनी है। उनके फंड कलेक्शन के श्रोतों की भी जानकारी करनी है।
जानें क्या है PFI
बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) एक भारतीय इस्लामवादी राजनीतिक संगठन है, जिसका गठन हिंदुत्व समूहों का मुकाबला करने के लिए किया गया था और मुस्लिम अल्पसंख्यक राजनीति की एक कट्टरपंथी और विशिष्ट शैली में संलग्न है। इसकी स्थापना 2006 में कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी और नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट के विलय के साथ हुई थी।
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