UP Basic Shiksha: बेसिक शिक्षा के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर बरसी महानिदेशक विजय किरन आनन्द की कृपा, आखिर शिक्षक कब तक करेंगे इंतजार?
लखनऊ। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों पर महानिदेशक विजय किरन आनन्द की कृपा बरसती दिखाई दे रही है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही बेसिक के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति होगी और इसी के साथ राज्य कर्मचारियों के साथ ही परिषदीय कर्मचारियों को भी सरकारी कार्य में लगाया जाएगा। इसके लिए जल्द ही प्रदेश भर के बीएसए को जल्द ही निर्देश दिया जाएगा और सर्कुलर जारी होगा। तो वहीं सवाल ये उठता है कि आखिर सालों से ब्लाक ट्रांसफर की मांग कर रहे शिक्षकों पर कब महानिदेशक अपनी कृपा दृष्टि डालेंगे।
बता दें कि सोमवार को पूर्व निर्धारित बैठक के तहत उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने महानिदेशक विजय किरण आनंद, सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल एवं जितेंद्र सिंह ऐरी उपनिदेशक से मुलाकात की और कर्मचारियों की समस्या को प्रमुखता से उठाया। संगठन के अध्यक्ष तापस कुमार मिश्रा एवं महामंत्री साहब सरताज, उपाध्यक्ष नमन मिश्रास परवेज आलम मंडल अध्यक्ष कानपुर मंडल, सुखेंद्र सिंह यादव जिला अध्यक्ष, अनूप शुक्ला मंडलीय कोषाध्यक्ष संतोष वर्मा, शमशाद अहमद उपाध्यक्ष की उपस्थिति में ये वार्ता सम्पन्न हुई। आगामी बैठक 20 दिसंबर 2022 को आहूत की जाएगी।
इन मांगों पर बनी सहमति
इस मौके पर निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति बनी नंबर एकृ अवकाश नकदीकरण तथा लिपिक संवर्ग का पुनर्गठन का नवीन प्रस्ताव शासन यथाशीघ्र भेजे जाने के निर्देश महानिदेशक विजय किरन आनन्द द्वारा दिए गए तथा विकासखंड पर लिपिकों को बिना जिला अधिकारी की अनुमति के न किए जाने के निर्देश दिए गए तथा राज कर्मचारी एवं परिषदीय कर्मचारियों से बिना भेदभाव के कार्य लिए जाने के लिए सभी सभी जनपदों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सर्कुलर निर्गत करने के निर्देश महानिदेशक द्वारा दिए गए। इसी के साथ प्रदेश के सभी जनपदों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के 20% पदों को पदोन्नति के द्वारा शीघ्र भर जाने के निर्देश दिए गए।
जानें क्या है बेसिक शिक्षकों की मांग
प्रदेश के बेसिक शिक्षक करीब एक साल से नियम के तहत म्युच्युल ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। शिक्षकों को अपने ही गृहजनपद में 150 से 200 किलोमीटर दूर स्थिर स्कूल जाना पड़ता है, लेकिन शासन व उच्चाधिकारियों का लापरवाही के कारण इन सबका सबसे ज्यादा खामियाजा दिव्यांग व महिला शिक्षकों को उठाना पड़ रहा है। इस सम्ंबध में प्रतिदिन शिक्षक मांग को लेकर ट्विटर पर अभियान चला रहे हैं, लेकिन साल भर बाद भी शिक्षकों की समस्या जस की तस है।