भूलते जा रहे हैं हम दादी-नानी के नुस्खे…इसीलिए हो रहे हैं बीमार
Mission Shakti- Vocal for Local: भारतवर्ष में हमारे बुजुर्ग ऐसे अनेक अनाजों और मसाले या स्वास्थ्यवर्धक शाक पत्तों पर आधारित पकवान और भोजन बनाते थे जिससे उन्हें वैद्य के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती थी। उन पकवानों और भोजन में ही स्वास्थ्यवर्धक और स्वास्थ्यरक्षक गुण होते थे जिन्हें हम नवीन जीवन शैली के कारण भूलते जा रहे हैं और इसी कारण अनेक रोगों से घिरते जा रहे हैं।
लगभग हर किसी का स्वास्थ्य खराब होने लगा है और कार्य करने की वह क्षमता नहीं रह जा रही है, जो उनकी उम्र में होनी चाहिए। ऐसे में यदि हम पुरानी जीवन शैली की तरफ लौटें और अपने खाने-पीने में उन नुस्खों को अपनाएं जो हमारी दादी नानी अपनाया करती थी तो शायद कई रोगों से स्वत: निजात मिल सकती है।
दूसरा यह कि आज उन पकवानों और भोजन बनाने के नुस्खे से हम अपना रोजगार भी स्थापित कर सकते हैं और दूसरों के जीवनयापन का जरिया भी बना सकते हैं।
बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज की पूर्व छात्रा मणि टंडन एक आदर्श उदाहरण हैं जिन्होंने कोरोना आपदा में घर में छुपी बैठी महिलाओं को रोजगार में लगाकर दादी नानी के नुस्खे को और भारतवर्ष में पैदा होने वाले मोटे अनाजों की गुणवत्ता और उपयोगिता को उन लोगों के सामने लाकर एक मिसाल कायम की है जो अच्छा, शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक खाना तो चाहते हैं पर उसे वह कहां से प्राप्त करें यह पता नहीं था, जिसे मणि टंडन ने श्री जगदंबा महिला गृह उद्योग स्थापित कर इसका एक विकल्प दे दिया और यह भी कि स्वदेशी वस्तुओं ही नहीं विचारों की तरफ भी कैसे लौटा जा सकता है इसका भी एक उजला रास्ता दिया है।
मार्ग प्रशस्त किया है। वह अपनी मातृ संस्था बालिका विद्यालय में थीं और छात्राओं को बड़े रुचिकर ढंग से यह सिखाया कि किस तरह हम स्वयं स्वस्थ रह सकते हैं और दूसरों को भी स्वस्थ रख सकते हैं। साथ में अपने आसपास के लोगों के घरों में चूल्हा जलते रहने का उपाय भी कर सकते हैं। उन्होंने स्वदेशी वस्तुओं के प्रति प्रेम, सशक्त भारत और वोकल फार लोकल की विस्तृत जानकारी और साथ ही छात्राओं को स्वावलंबी बनने के गुर दिए।
विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने बैज लगाकर उनका स्वागत किया। यह कार्यक्रम उत्तरा सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। मणि टंडन ने छात्राओं को मल्टीग्रेन (मोटे अनाज) की आवश्यकता, उसके महत्व पर विस्तार से बताया और उनसे अपेक्षा की कि वे उसका अपने खाने में किसी भी रूप में इस्तेमाल करें और उसके लाभ की जानकारी औरों को भी अवश्य दें। इसके अतिरिक्त उन्होंने पैकेट बंद खाना, मैदे, सल्फर युक्त चीनी, विभिन्न प्रकार के ठंडे पेय इत्यादि से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुप्रभाव के विषय में भी बताया।