Uttar Pradesh में अग्निवीरों के लिए बड़ी खुशखबरी….योगी कैबिनेट ने प्रदेश के हित में लिए ये 10 फैसले-Video

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Yogi Cabinet Meeting: मंगलवार यानी आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई. इस मौके पर प्रदेश हित में योगी सरकार ने 10 बड़े फैसले किए. लोकभवन के सभागार में आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 11 प्रस्ताव अनुमोदन के लिए रखे गए, जिसमें कैबिनेट ने 10 प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई है. इसमें से मुख्य है अग्निवीरों के लिए आरक्षण और पर्यटकों के लिए सुविधा.

दरअसल पर्यटन विभाग ने प्रस्ताव रखा था और कहा था कि अक्सर देखने में आता है कि प्रमुख धार्मिक या पर्यटन स्थलों पर होटल फुल हो जाते हैं, जिससे पर्यटकों को रुकने में परेशानी होती है. इसी समस्या के समाधान के लिए यह नीति तैयार की गई है औऱ इस बैठक में उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) और होमस्टे नीति-2025 को मंजूरी दे दी गई. इस नई नीति का उद्देश्य राज्य के धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने की बेहतर और सुलभ सुविधा प्रदान करना है.

पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत मिलेगा आरक्षण

मालूम हो कि भारत सरकार ने अग्निपथ योजना की शुरुआत की थी, जिसके तहत अग्निवीरों को रोजगार देने और उन्हें हर तरह से मजबूत करने के लिए आयु सीमा 4 साल के लिए 17.5 से 21.5 वर्ष के बीच रखी गई थी. इसी के साथ ही इस योजना के तहत उन्हें प्रोत्साहन राशि देकर विदा किया जाता है. इसी योजना में रिटायर हुए अग्निवीरों को प्रदेश सरकार ने 20% क्षैतिज आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है. इसमें 3 वर्ष की आयु में छूट का प्रावधान भी किया गया है

इस तरह से उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी, पीएसी, आरक्षी घुडसवार और फायरमैन की सीधी भर्ती में पूर्व अग्रिवीरों को (4 साल की सेवा के पश्चात) 20 प्रतिशत पदों को आरक्षित रखते हुए क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा. यानी भूतपूर्व सैनिक की तरह अग्निवीर के रूप में की गयी सेवा अवधि को घटाते हुए अधिकतम आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट प्रदान की जायेगी.

बता दें कि केंद्र सरकार की इस योजना के तहत अग्निवीरों का पहला बैच 2026 में सेवा से बाहर आएगा. तब उत्तर प्रदेश प्रदेश सरकार के इस निर्णय का लाभ अग्निवीरों को मिल सकेगा.

बीएंडबी और होमस्टे नीति-2025 से ये मिलेगी सुविधा

बता दें कि बीएंडबी और होमस्टे नीति-2025 के तहत धार्मिक और पर्यटन स्थलों में कोई भी व्यक्ति अपने 1 से 6 कमरों तक की इकाई को होमस्टे के रूप में रजिस्टर करा सकता है. इस नीति के तहत अधिकतम 12 बेड की अनुमति दी जाएगी. कोई भी पर्यटक लगातार 7 दिन तक इस सुविधा का लाभ उठाते हुए यहां ठहर सकेगा. तो वहीं 7 दिन से अधिक दिन तक ठहरने के लिए रिन्यूअल की भी व्यवस्था भी दी जाएगी. बता दें कि इसके लिए अनुमति जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की अगुवाई वाली कमेटी देगी.

नाममात्र लिया जाएगा शुल्क

वित्त और संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि शहरी या सिल्वर श्रेणी के होमस्टे के लिए 2000 रुपये का आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है. तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे इकाइयों के लिए 500 से 750 रुपये तक का नाममात्र शुल्क लिया जाएगा. इसी के साथ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थलों के कारण यह राज्य विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है. राज्य में पहले ऐसी कोई नीति न होने के कारण होमस्टे संचालकों को केंद्र सरकार के निधि प्लस पोर्टल पर पंजीकरण कराना पड़ता था. उन्होंने आगे कहा कि अब राज्य सरकार की इस नई नीति के तहत वे स्थानीय निकायों की अनापत्ति लेकर सरल प्रक्रिया से पंजीकरण कर सकेंगे.

मिलेगा रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा

सुरेश खन्ना ने प्रदेश में पर्यटन और रोजगार को लेकर कहा कि इस नीति के लागू होने से न केवल पर्यटकों को सस्ते और सुविधाजनक ठहरने का विकल्प मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे. नीति में वित्तीय प्रोत्साहन और अनुदान की भी व्यवस्था की गई है, ताकि राज्य के निवासियों को प्रोत्साहित किया जा सके कि वे अपने घरों को पर्यटन हित में उपयोग करें. यह नीति प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी.

इनको मिलेगी प्रोत्साहन धनराशि

मालूम हो कि योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश और रोजगार प्रोत्साहन नीति-2017 के तहत मेगा श्रेणी के औद्योगिक उपक्रमों के द्वारा 5 इकाईयों को प्रोत्साहन धनराशि दिए जाने का निर्णय भी किया है.

अन्नपूर्णा भवनों का कराया जा रहा है निर्माण

मालूम हो कि प्रदेश के प्रति जनपद 75-100 अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण प्रति वर्ष कराया जाना है. इसके अतिरिक्त इस भवनों के अनुरक्षण इत्यादि की व्यवस्था का भी प्राविधान किया गया है. इसी को लेकर वित्तमंत्री ने बताया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सुदृढ करने और राशन कार्ड धारकों को खाद्यान्न सुचारू रूप से उपलब्ध कराने के लिए मॉडल उचित दर दुकानों/अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण कराया जा रहा है. उन्होने कहा कि इन भवनों के निर्माण में गति लाने के लिए राजकोषीय बचत से भी अन्नपूर्णा भवनों के निर्माण का निर्णय लिया गया है. वह आगे बोले कि अब मनरेगा के अतिरिक्त राज्य वित्त आयोग, सांसद निधि, विधायक निधि, पूर्वांचल विकास निधि, बुन्देलखण्ड विकास निधि या अन्य किसी राज्य या केन्द्र सरकार की योजना, जिसमें इनका निर्माण अनुमन्य है, अन्नपूर्णा भवनों का निर्माण कराया जा सकेगा. उन्होंने जानकारी दी कि जहां पर भी इन योजनाओं के माध्यम से धनराशि उपलब्ध नहीं हो सकेगी, वहां पर खाद्य और रसद विभाग द्वारा बचत से धनराशि की व्यवस्था की जाएगी.

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