Lucknow: मां पीतांबरा देवी के महायज्ञ में सम्मलित होने पहुंचे सपा प्रमुख अखिलेश यादव को दिखाया गया काला झंडा, वीडियो वायरल, अखिलेश ने साधा भाजपा पर निशाना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के झूलेलाल पार्क में महीनों से चल रहे मां पीतांबरा देवी के महायज्ञ में सम्मिलित होने के लिए शनिवार को सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पहुंचे तो उन्हें काले झंडे का सामना करना पड़ा। हिंदू संगठनों ने काला झंडा दिखाकर उनका विरोध किया और आरोप लगाया कि उन्होंने सनातन धर्म के नियमों का उल्लंघन किया है।
देखें क्या आरोप लगाए हिंदू संगठनों ने
हिंदू संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि अखिलेश की पार्टी के ही नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने सनातन धर्म के ग्रंथ श्रीरामचरितमानस का अपमान किया है। इसी के साथ संतों और महंतों को आतंकवादी बोला है, जो कि घोर पाप है, लेकिन अभी तक उन्होंने उनको पार्टी से बाहर नहीं किया है। बल्कि उनको पार्टी की अन्य जिम्मेदारियां सौंप रहे हैं। इसी के साथ ये भी आरोप लगाया कि यज्ञ में पीले वस्त्र धारण कर के उनको आना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनकी पार्टी के लोग सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं और वह यज्ञ में जाकर खुद को सनातनी होने का दावा कर रहे है, ये सिर्फ एक ढोंग है। उनको यज्ञ में शामिल होने का कोई अधिकार नहीं है।
देखें क्या कहा अखिलेश ने
इस पूरे मामले को लेकर अखिलेश यादव ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी बेरोजगारी और महंगाई पर कोई कार्य नहीं कर रही है, इसलिए लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के काम कर रही है। अब मैं समझ सकता हूं कि बीजेपी सरकार ने जनबूझकर मेरी एनएसजी क्यों हटाई। सिक्योरिटी क्यों कम की। मेरा घर क्यों छीना। यूपी में किसी के साथ कुछ भी हो सकता है। आज मैं समझ सकता हूं। ये बीजेपी के लोग हैं। बीजेपी के लोग हम लोगों को शूद्र मानते हैं। उनको ये तकलीफ है कि हम लोग क्यों गुरु- संत लोगों का आशीर्वाद लेने जा रहे हैं। समय बदलेगा. तब उन्हें पता चलेगा। उनके साथ भी ऐसा ही होगा। इसी के साथ उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्या द्वारा रामचरितमानस के किए गए अपमान के बारे में पूछा गया तो वह टाल गए और कहा कि मौर्या जी को कहा कि जाति जनगणना के मामले में आगे बढ़ें।
जानें क्या कहा था सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने
बता दें कि हाल ही में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्या ने हिंदू धर्मग्रंथ श्रीरामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी करते हुए कहा था कि रामचरितमानस में दलितों और महिलाओं का अपमान किया गया है। तुलसीदास ने इसे अपनी खुशी के लिए लिखा था। करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते। उन्होंने सरकार से इस पर प्रतिबंध तक लगाने की मांग तक कर दी। मौर्य ने रामचरितमानस को बकवास बताते हुए इसकी कुछ चौपाइयां हटवाने की मांग की थी। (photo credit @yadavakhilesh)
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