Painting Exhibition: चित्रकला प्रदर्शनी में दिखा एक्रेलिक कलर के साथ स्टेडलर कलर, स्प्रे कलर तथा कोलाज विधा का अनोखा संगम

September 5, 2023 by No Comments

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Painting exhibition: चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन ललित कला अकादमी सेक्टर ई, अलीगंज लखनऊ में किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन राजेंद्र प्रसाद (प्रख्यात कलाकार एवम भूतपूर्व एचओडी फाईन आर्ट्स dsmnru लखनऊ ) और डॉ. अवधेश मिश्रा (प्रख्यात कलाकार एवं कला समीक्षक) के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ देवेंद्र कुमार त्रिपाठी (रीजनल सेक्रेटरी, ललित कला अकादमी रीजनल सेंटर, लखनऊ) रहे. बता दें कि प्रदर्शनी का आयोजन 1 से 5 सितंबर तक हुआ.

इस मौके पर नवोदित चित्रकार दिव्यांशी मिश्रा ने विद्यार्थियों को लाइव पेंटिंग कर खूब तालियां बटोरी. उन्होंने बताया कि, इस प्रदर्शनी को आयोजित करने की प्रेरणा उनको उनके माता- पिता से मिली। उन्होंने कहा कि, मैं अपनी चित्रकला द्वारा अपने पिता स्व० श्री आलोक मिश्रा जी को अपना प्यार तथा सम्मान देना चाहती हूं। मालूम हो कि इस कला प्रदर्शनी में दिव्यांशी की 33 रचनाएं, अधिकतर प्रकृति व मनुष्य के बीच का सामंजस्य दिखाने का प्रयास किया हैं। जिसको दर्शाने के लिए दिव्यांशी ने भिन्न- भिन्न कला माध्यमों का प्रयोग किया हैं। मुख्यता रचनाएं ऐक्रेलिक माध्यम में बनी हैं, आपकी चित्रकला को देखकर सहज ही पता चलता है कि दिव्यांशी कला जगत में काफी कार्य करने की संभावनाएं रखती हैं।

दिव्यांशी के अनुसार वह कहती है कि मैं रंग को अपने ढंग से देखती हूं तथा मां डॉ. रूपम मिश्रा ( रूपम आलोक ) की तरह कुछ नये तरीके से विचारों को प्रस्तुत करना पसंद करती हूं। मैंने अपनी कृतियों में एक्रेलिक कलर के साथ स्टेडलर कलर, स्प्रे कलर तथा कोलाज विधा आदि का उपयोग किया है।

मैंने रंगो में पारदर्शिता लाने के लिए स्प्रे कलर का प्रयोग किया है। यूं तो मैंने अनेक प्रकार की कृतियां म्यूरल, पोट्रेट,दृश्य चित्र आदि बनाए हैं, मेरी प्रमुख कृतियां प्रकृति की संवेदनाओं से जुड़ी हैं, इन कृतियों में मछली तथा मानवीय कृतियां हैं। मछली अत्यधिक प्रेम का प्रतीक है जो जल से विलग (अलग) नहीं रह सकती, साथ ही चिड़िया को संयोजित किया है। मछली और चिड़िया शुभत्व तथा जीवन का प्रतीक है। स्त्री तथा पुरुष आकृतियां सामाजिक परिवेश, स्नेह, सृष्टि को सुचारु रुप से अग्रसारित रखते है ।

मैं अपनी कृतियों के माध्यम से संदेश देना चाहती हूं कि कोई भी व्यक्ति प्रकृति के बिना, उसके सानिध्य के बगैर नहीं रह सकता, इसलिए हम सबको प्रकृति की महत्ता को जानना चाहिए तथा उसे सुरक्षित रखना चाहिए। हमें समझना होगा कि प्रकृति में सभी जीव महत्वपूर्ण है । मेरी कृतियां मानवीय संवेदनाओं से प्रभावित है तथा मेरी कुछ कृतियां जीवन की विषम परिस्थितियों से निकलने का प्रयास करती प्रदर्शित होती है । मै राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के कार्य को देखने समझने का प्रयास करती हूं और सभी के चित्रण कार्य का सम्मान करती हूं तथा उनके द्वारा प्रयुक्त की गई विधा को आत्मसात करने की भी कोशिश करती हूं पर फिर भी मैं किसी एक से प्रभावित नहीं हूं। मुझे अपने गुरुजन प्रो० राजेंद्र प्रसाद, प्रो० अवधेश मिश्र, प्रो० सुनीता शर्मा, प्रो० संतोष कुमार वर्मा तथा प्रो० अभय द्विवेदी जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त है।