“मां कहती थी भाई बुलाओ…लेकिन” लव स्टोरी को लेकर अभिनेता पंकज त्रिपाठी की पत्नी ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
Pankaj Tripathi Love Story: हिंदी सिनेमा में फिलहाल पंकज त्रिपाठी अब किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने अपनी उम्दा अदाकारी से बॉलीवुड में एक अलग पहचान बना ली है. उन्होंने हर जॉनर की फिल्मों में अपने अदाकारी के जलवे बिखेरे हैं. फिल्मों में वह इतने सीरियस लगते हैं कि उनको देखकर ये लगता ही नहीं कि उनका जीवन इतना रोमांटिक भी हो सकता है हालांकि वह अक्सर ही कई मंचों पर अपने जीवन की लव स्टोरी को शेयर करते रहे हैं, लेकिन उनकी पत्नी मृदुला ने एक किस्से के माध्यम से अपने जीवन के उन पलों के शेयर किया है जिसे शायद ही आज तक कोई जानता होगा.
फिल्म निर्माता अतुल तैशेते के साथ हुई बातचीत में अभिनेता पंकज त्रिपाठी की पत्नी मृदुला ने बताया कि उनकी प्रेम कहानी 1993 में शुरू हुई। पहली बार उनको एक तस्वीर में देखा था. मृदुला ने बताया ‘मैंने अपने पति को और उन्होंने मुझे पहली बार 23 मई 1993 को देखा था. उससे पहले हमने एक दूसरे को तस्वीरों में देखा था. यह तस्वीर मेरे भाई की शादी के लिए थी. एक लड़की की तस्वीर आई थी. तस्वीर में उसके दो भाई और माता-पिता थे. यह तब आई थी जब मैं कक्षा-9 में थी और वह कक्षा-11 में थे.
छोटे भाई के तिलक पर हुई थी पंकज से मुलाकात
मृदुला ने आगे बताया कि मृदुला ने पंकज को सामने से पहली बार अपने भाई के तिलक के दिन देखा था। मृदुला कहती हैं कि मैं अभी भी पंकज से कहती हूं कि मैंने तुम्हें तब देखा था जब तुम्हारी दाढ़ी आनी शुरू हुई थी और अब मैं तुम्हें तब देख रही हूं जब तुमने चश्मा लगा लिया है। यह एक लंबा सफर रहा है। इससे पहले वह बताती हैं कि उसी समय उन्होंने उस तस्वीर को अपने बैग में रख लिया और स्कूल ले गईं, जिसे देखकर उनकी दोस्त उन्हें काफी चिढ़ाती थीं और कहती थीं कि छोटा भाई तुम्हारे साथ अच्छा लगेगा। तो वहीं मृदुला कहती हैं कि हमने एक-दूसरे को तिलक के दौरान कई बार देखा.
फिर ढूंढने लगे मिलने की वजह
मृदुला ने अपनी प्रेम कहानी को लेकर आगे बताया कि हम दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे और फिर कहानी आगे बढ़ाने के लिए और मिलने के लिए वजह ढूंढने लगे लेकिन उनकी इस प्रेम कहानी में खास रोल रूमाल ने निभाया। मृदुला यहां पर बड़ा ही दिलचस्प किस्सा सुनाती हैं, वह कहती हैं कि हमारे बीच बातचीत की शुरुआत ऐसे हुई कि तिलक के दौरान उन्होंने हाथ धोया तो फिर रुमाल चाहिए और वह देने में हाथ टच होना ही था, जो कि आपको एक अलग अहसास देता है। फिर सिलसिला आगे बढ़ा। मैं पंकज को आप कहती थी।
वह मेरी भाभी के भाई हैं
मृदुला कहती हैं कि उनसे सामने उस वक्त बड़ी ही अजीब स्थिति पैदा हो गई जब मां ने मुझसे पंकज को भैया बुलाने के लिए कहा. वह हम दोनों के अहसास से बिल्कुल अनजान थीं. वह मेरी भाभी के भाई थे और मुझसे दो साल बड़े थे। तो वहीं मां के कहने के बाद मैं दुविधा थी और मैं उन्हें भैया नहीं कह सकती थी। मैंने पंकज जी से शुरुआत की और उन्हें कभी भैया या पंकज नहीं कहा।
पंकज को बुलाती हैं पति
पंकज और मृदुला की एक बेटी है, जिसका नाम आशी है. मृदुला ने कहती हैं कि वह आज भी पंकज को पति बुलाती हैं. वह कहती हैं कि 1993 में शुरू हुई एक छोटी सी प्रेम कहानी 2004 में शादी में बदल गई थी. सबसे बड़ी बात तो ये रही कि दोनों ने कभी एक-दूसरे से अपने प्यार का इजहार नहीं किया था बल्कि मृदुला ने ही शादी करने की गुजारिश की थी वो भी तब जब पंकज एनएसडी में थे। तो वहीं मृदुला कहती हैं कि जब वह 6 महीने या एक साल में कलकत्ता (कोलकाता) आते थे तो जानबूझकर मेरे पैर छूते थे। वह बहुत शरारती हैं और उनकी ये ही शरारत उनको हमेशी ही अच्छी लगी.