Atul Subhash Suicide Case: ‘कोर्ट या रीता कौशिक की कोई गलती नहीं…’ Video में क्या बोले अतुल सुभाष की पत्नी के वकील; जानें पति के हक के लिए क्या कहता है कानून?

December 11, 2024 by No Comments

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Atul Subhash Suicide Case: बेंगलुरू के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. इस मामले में पूरी तरह से उनकी पत्नी निकिता सिंघानिया को दोषी माना जा रहा है क्योंकि आत्महत्या करने से पहले अतुल ने 40 पेज का सुसाइड नोट लिखने के साथ ही करीब डेढ़ घंटे का वीडियो भी बनाया था, जो कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

इसी बीच निकिता के वकील का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि ये घटना दुखद है लेकिन अतुल के पास स्थानीय कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का पूरा रास्ता खुला था. इसी के साथ ही वकील ने ये भी कहा है कि कोर्ट या जज रीता कौशिक का इसमें कोई दोष नहीं है. तो वहीं इस मामले में निकिता के ताऊ का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होने कहा है कि इस केस से उनको कोई लेना देना ही नहीं और न ही वह मौके पर कभी मौजूद रहे. बता दें कि जो एफआईआर दर्ज की गई है उसमें निकिता के साथ ही उनके भाई-मां और ताऊ का भी नाम शामिल है.

बता दें कि अतुल बेंगलुरु की एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले 34 साल के इंजीनियर थे और उनके ऊपर उनकी पत्नी ने कई मुकदमे कर रखे थे. भरण पोषण, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और तलाक के मामले भी इसमें शामिल थे. अतुल सुभाष यूपी के रहने वाले थे. उनकी मौत के बाद न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. तो वहीं सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि कानून में भी केवल महिला को ही सपोर्ट किया जाता है. पुरुषों की कोई सुनता ही नहीं. ऐसे तमाम मामले हैं जिसमें पति दोषी नहीं होती, फिर भी उसे ही दोषी ठहराया जाता है.

तो वहीं इस घटना के बाद एक सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि क्या हमारे देश में पुरुषों के लिए इस तरह के मामलों में कोई कानून है या नहीं. फिलहाल इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील आजाद खोखर का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

जानें क्या कहते हैं सुप्रीम कोर्ट के वकील?

सुप्रीम कोर्ट के वकील आजाद खोखर ने लोकल18 से बात करते हुए कहा कि लोअर ज्यूडिशरी एक तरफा काम करती है. कई बार वह सिर्फ महिलाओं के हक में ही बात करती है. चाहे उन्हें तमाम बार यह दिशा निर्देश क्यों ना मिले हों कि वो पति-पत्नी के मामलों में दोनों की सुने और सही सुनवाई करे. इसके बाद जिला स्तर तक सिर्फ एकतरफा फैसला होता है. आजाद शेखर ने आगे बताया कि लोअर ज्यूडिशरी पुरुषों की बातों को एक तरफ से नजरअंदाज कर देते हैं. यही वजह है कि अतुल सुभाष जैसे आत्महत्या के मामले होते रहते हैं. लोअर ज्यूडिशरी की सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट या किसी भी न्यायालय द्वारा मॉनिटरिंग होनी चाहिए, क्योंकि उस स्तर पर कहीं ना कहीं एक तरफा ही काम होता है और महिलाओं के हक में ही सारी सुनवाई होती है.

पति को भी मिला है ये अधिकार

आजाद खोखर ने हिंदू मैरिज एक्ट को लेकर बताया कि इसमें पति-पत्नी किसी के लिए कोई भेदभाव नहीं है. दोनों के लिए सामान्य न्याय है लेकिन कई बार पुरुष सही वकील या सही सिस्टम को नहीं समझ पाते और यही वजह है कि वे परेशान हो जाते हैं. पुरुष और महिला दोनों के मेंटेनेंस की व्यवस्था हिंदू मैरिज एक्ट में की गई है. उन्होंने आगे बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस है कि अगर पत्नी कमा रही है तो भी वह मेंटेनेंस मांग सकती है. इसी तरह पति भी मेंटेनेंस मांग सकता है. उन्होंने एक मामले को उदारण के तौर पर बताया कि मुंबई हाई कोर्ट ने 2015 में पत्नी द्वारा पति को 3,000 रुपये महीने अंतरिम भरण पोषण के तौर पर देने के निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया था. हाई कोर्ट ने कहा था कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-25 के तहत पति पत्नी दोनों को एक दूसरे से भरण पोषण मांगने का अधिकार है.

जानें क्या है घरेलू हिंसा का कानून?

घरेलू हिंसा कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील ने बताया कि वैसे तो पत्नी के पास घरेलू हिंसा का कानून है, पति के लिए वैसा कोई कानून आज तक बना ही नही है. घरेलू हिंसा से सुरक्षा का कानून सिर्फ पत्नी के लिए है, पति के लिए नहीं. अगर पति को ये महसूस हो रहा है कि पत्नी ने झूठा केस उसके ऊपर किया है और उसके परिवार को झूठे मामले में फंसाया जा रहा है तो वो पूरे साक्ष्यों के साथ थाने में जाकर पत्नी के खिलाफ और उसके परिवार के खिलाफ प्रताड़ना का केस कर सकता है. क्योंकि इस तरह के मामले को मानसिक प्रताड़ना की श्रेणी में रखा जाएगा और इसी के आधार पर पति अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी कोर्ट में लगा सकता है, सेक्शन 498a के तहत. इस तरह से पुरुष भी अपना पक्ष मजबूती के साथ रख सकता है. तो वहीं तमाम लोगों का कहना है कि आत्महत्या का रास्ता चुनना कोई विकल्प नहीं है.

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